नई बनेगी खाद्य सुरक्षा सूची
भास्कर न्यूज - अलवर
कांग्रेस शासनकाल में बनी खाद्य सुरक्षा कानून पात्रता सूची को दुरुस्त किया जाएगा। जिले में इस पर करीब तीस लाख खर्च होंगे। इसके लिए फिलहाल जिले को आठ लाख दिए गए हैं। रसद विभाग को अनुमान है कि ऑनलाइन डाटा रिकार्ड होने के बाद पात्र सदस्यों की संख्या में करीब चार लाख तक की कमी हो जाएगी। यह संख्या अभी 28 लाख से अधिक है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामला विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अशोक शेखर के आदेशों के बाद अब जिले की सभी पंचायत समितियों में विकास अधिकारियों द्वारा डाटा रिकार्ड के लिए निविदाएं आमंत्रित की जाएंगी। सूची दुरुस्त करने के लिए एक परिवार की फीडिंग पर अधिकतम पांच रुपए खर्च किए जा सकेंगे। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि पुरानी गलतियों को जिले में सुधारने के लिए करीब 30 लाख का बजट खर्च होगा।
सचिव की मौजूदगी में दर्ज होगा डाटा
नए आदेशों के बाद ग्राम पंचायतों में ग्राम सचिवों की उपस्थिति में डाटा दर्ज होंगे। यदि किसी पात्र परिवार या सदस्य का नाम एक से अधिक योजना में है तो उसे दूर कराने की जिम्मेदारी सचिवों पर रहेगी। ग्राम सचिव संबंधित पंचायत के सरपंच आदि से भी मदद लेकर डबल नामों को हटाने का काम करेंगे।
गलत सूची ने कराई मशक्कत
ग्राम सचिवों द्वारा तैयार सूची के आधार पर रसद विभाग ने राशन डीलर्स को गेहूं सप्लाई कर दिया। अब जहां 45 सौ लोगों के हिसाब से राशन भेजना था वहां महज 13 सौ के लिए गेहूं भेजा, वहीं टहला, स्यालूता, तिलवाड़ जैसी ग्राम पंचायतों में पात्र जनों के हिसाब से ज्यादा राशन पहुंच गया। जहां कम राशन पहुंचा वहां लोग आक्रोशित हो गए और बामणवास कांकड़ आदि स्थानों पर रोड जाम जैसी स्थितियां बनने लगी।
॥खाद्य सुरक्षा कानून की पात्रता सूची में खामियों को दूर कर ऑनलाइन डाटा रिकार्ड करने के लिए बजट मिल गया है। जल्द ही पंचायत समितियों में प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
आरसी मीणा, जिला रसद अधिकारी
गंभीर थी खामियां
सरकारी दबाव के चलते आनन-फानन में तैयार हुई पुरानी सूची में कई गंभीर खामियां रह गई। थानागाजी क्षेत्र के बामणवास कांकड़ गांव के लिए जो सूची तैयार हुई उसमें कुल 1276 पात्र घर दिखाकर कुल 1340 सदस्य बताए गए। वहीं टहला में कुल 1687 घर दिखाते हुए कुल 15605 की आबादी दर्शा दी। हकीकत में बामणवास कांकड़ में 45 सौ और टहला में 7 हजार लोगों को शामिल किया जाना था। इसी तरह तिलवाड़ में 1301 घरों के 12 हजार 785 लोगों को खाद्य सुरक्षा कानून के दायरे में मान लिया गया। जिले की अधिकतर पंचायत समितियों की ग्राम पंचायतों में ऐसी ही गड़बडिय़ां सामने आ रही हैं। इन गलत आंकड़ों को ही ऑन लाइन भी कर दिया गया था।