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जैन समाज को आरक्षण नहीं, संरक्षण की जरूरत
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भास्कर विशेष=
बांसवाड़ा। केंद्र सरकार द्वारा जैन समाज द्वारा पिछले लंबे समय से की जा रही अल्पसंख्यक वर्ग का दर्जा दिए जाने की मांग केंद्र सरकार द्वारा माने जाने और अध्यादेश जारी करने के बाद अब जैन समाज को संवैधानिक संरक्षण मिलेगा। अब तक देश में मुसलमान, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी समाज को अल्पसंख्यक वर्ग का दर्जा प्राप्त था, वहीं अब देशभर के 50 लाख जैन समाज के लोगों को 27 जनवरी को अध्यादेश जारी होने से अल्पसंख्यक वर्ग का दर्जा मिल चुका है। इस संबंध में 20 जनवरी को केंद्र सरकार द्वारा मंजूरी दे दी गई थी। जैन समाज के लोगों का मानना है कि उनका समाज अपने आप में पूर्णतया संपन्न है। जैन धर्म को अल्पसंख्यक के रूप में आरक्षण नहीं संरक्षण की जरूरत है। अल्पसंख्यक की मान्यता के निर्णय से जैन धर्म की देव, गुरु, संस्कृति, लिपि और पूजा पद्धति को संवैधानिक संरक्षण मिलेगा और सुरक्षा भी मिलेगी। भास्कर ने इस अवसर पर जैन समाज के लोगों ने खुलकर अपनी बात कही व विचारों से अवगत करवाया।
जैन समाज का हर दृष्टि से विकास होगा:आर्यिका पूर्णमति माताजी
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आचार्य विद्यासागर महाराज की सुशिष्या ने भारत सरकार ने जैन समाज को अल्पसंख्यक घोषित किया है। इससे ये साबित हो रहा है कि जैन धर्म का अपना एक अलग और स्वतंत्र अस्तित्व है। दूसरा इससे जैन समाज के धार्मिक एवं शैक्षणिक संस्थानों को संविधान द्वारा प्रदत्त संरक्षण मिलेगा। जैन धर्म के सर्वोच्च गुरुवर आचार्य विद्यासागर महाराज द्वारा जैन समाज की पताका फहराते हुए कई जिनालयों, धार्मिक व शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना की है, जिनका उन्नयन हो रहा है। जैन समाज को अल्पसंख्यक घोषित करने से जिनालयों, धार्मिक व शैक्षणिक संस्थानों को शासन का सहयोग मिलेगा व साथ ही सुरक्षा भी प्राप्त होगी।
ये विचार हैं जैन समाज के लोगों के
1.मेवाड़=वागड़ प्रांतीय दशा नरसिंहपुरा दिगंबर जैन महासभा के अध्यक्ष व मुनिसेवा संघ समिति के सचिव महावीर बोहरा ने कहा कि जैन समाज को अल्पसंख्यक का दर्जा काफी पहले दिया जाना था। लेकिन अब जब ये मांग पूरी हो चुकी है, तो इसके समाज में सामाजिक, शैक्षणिक, राजनीतिक उन्नति की दृष्टि से बेहतर परिणाम सामने आएंगे।
2. श्रीश्रीमाल जैन सेठिया समाज के एडवोकेट कन्हैयालाल जैन ((सेठिया)) ने कहा कि जैन समाज को अल्पसंख्यक का दर्जा 20 वर्षों पूर्व दिया जाता तो देशभर में जैन समाजबंधु अब तक प्रशासनिक, राजनीतिक व दूसरे क्षेत्रों में कहीं अधिक तरक्की कर जाते।
3. आदेश्वर जैन ने कहा कि अल्पसंख्यक वर्ग का दर्जा दिए जाने से अब जैन समाज की शैक्षणिक संस्थाएं अपनी शर्तों पर संचालित की जा सकेंगी और उन्हें आरक्षण संबंधी दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा। वहीं नई शिक्षण संस्थाओं के लिए सहजता से भूमि मिल सकेगी।
4. बाहुबली जैन समाज के पूर्व अध्यक्ष शंकरलाल जैन ने कहा कि अल्पसंख्यक का दर्जा मिलने के बाद अब यह युवाओं पर निर्भर करता है कि वे संवैधानिक संरक्षण का दूरगामी लाभ किस तरह से उठा पाते हैं। प्रावधान तो बहुत होते हैं लेकिन समय रहते उनका समाज के हित में उपयोग करने के लिए मिलजुल कर कार्ययोजना बनानी होगी।
5. जैन समाज नवयुवक मंडल बाहुबली कॉलोनी के सचिव प्रफुल्ल जैन ने बताया कि अब युवाओं को छात्रवृत्ति, उच्चशिक्षा, दक्षता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम, कम्प्यूटर=अंग्रेजी प्रशिक्षण कार्यक्रम, आईएएस आदि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारियों के लिए अनुप्रति योजना का लाभ उठाना होगा।
6.ट्रैवल्स व्यवसायी अंकित बोहरा ने बताया कि भारत सरकार के 15 सूत्रीय कार्यक्रम अंतर्गत राष्ट्रीय बैंकों से स्वरोजगार के लिए ऋण योजनाओं पर विशेष ध्यान देना होगा। जिससे कि युवा रोजगारपरक कार्यक्रमों से जुड़ सकें।
7. युवा व्यवसायी संजय जैन ने कहा कि अब जैन समाज के युवा आईटीआई,आईआईएम आदि कोर्स के लिए राज्य से बाहर प्रवेश लेने पर मकान किराया पुनर्भरण के हकदार होंगे। इसके लिए उन्हें कुछ शर्तों का भी पालन करना होगा। साथ ही कलेक्टर की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली त्रैमासिक बैठक में भी अपनी सक्रिय भागीदारी रखनी होगी।
इन राज्यों में पहले से हैं अल्पसंख्यक
झारखंड, पंजाब, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, असम, पश्चिमी बंगाल, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु में पहले से अल्पसंख्यक हैं।
पहले विरोध के चलते पारित नहीं हुआ बिल
केंद्रीय कैबिनेट की ओर से जैन समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा देने का निर्णय कई मायने में महत्वपूर्ण है। समाज के लोगों का कहना है कि वर्ष 1996 में एचडी देवगौड़ा सरकार ने ऐसा निर्णय किया था, लेकिन उनके घटक दलों के विरोध से बिल पारित नहीं हो पाया और मामला टल गया था। लेकिन इस बार 2014 में केंद्र की यूपीए सरकार में शामिल अधिकतर घटक दलों की अपनी राज्य सरकारों ने तो पहले से ही दर्जा दे रखा है। इससे सहमति बनने में दिक्कत नहीं आ पाई।
संस्थाएं सरकारी हस्तक्षेप से मुक्त होगी
समाजबंधुओं का मत है कि जैन समुदाय के मंदिर, ट्रस्ट, धार्मिक संस्थाएं एवं शैक्षणिक गतिविधियां जैसे स्कूल, कॉलेज सरकारी हस्तक्षेप से मुक्त हो जाएंगी। अब तक इन संस्थाओं में कई अवसरों पर सरकार का दखल होता था। अल्पसंख्यक का दर्जा मिलने के बाद जैन समुदाय अपने स्तर पर संस्थाओं को अपने कायदे से संचालित करेगा, जिससे समाज के सभी वर्गों को उसका सीधा लाभ मिलेगा। शिक्षण संस्थानों का जैन समाज के लोग स्वतंत्रतापूर्वक संचालित कर सकेंगे।
युवा वर्ग को लक्ष्य पाने में सुविधा होगी
समाज को अल्पसंख्यक का दर्जा मिलने के बाद समाज के युवा को अपना कॅरिअर बनाने और लक्ष्य प्राप्त करने में सुविधा मिलेगी। प्रशासनिक सेवाओं और व्यावसायिक पाठ्यक्रम, खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों का युवाओं को लाभ मिलेगा। साथ ही युवाओं को छात्रावास सुविधा, छात्रवृत्ति का लाभ, स्कॉलरशीप, प्रशिक्षण के अवसर मिलेंगे और रोजगारपरक योजनाओं में सीधा लाभ मिलेगा। इससे समाज के युवाओं को प्रोत्साहन मिलेगा। वे प्रशासनिक सेवाओं में भी लाभ उठा सकेंगे।
अल्पसंख्यक का दर्जा मिलने से ये होंगे लाभ
> जैन धर्म की सुरक्षा होगी।
> जैन धर्म की नैतिक शिक्षा पढ़ाने का जैन स्कूलों को अधिकार होगा।
> जैन कॉलेजों में समाज के बच्चों को 50 प्रतिशत आरक्षित सीटें मिलेंगी।
> कम ब्याज पर लोन, व्यवसाय व तकनीकी शिक्षा उपलब्ध होगी।
> धार्मिक स्थल, संस्थाएं, मंदिर, तीर्थ क्षेत्र एवं ट्रस्ट अधिग्रहण नहीं होंगे और समुचित विकास एवं सुरक्षा के व्यापक प्रबंध होंगे।
> जैन मंदिरों, तीर्थ स्थलों, शैक्षणिक संस्थाओं इत्यादि का प्रबंध समुदाय कर सकेगा।
> जैन धर्मावलंबी अपनी प्राचीन संस्कृति, पुरातत्व एवं धर्म स्थानों का सरंक्षण कर सकेंगे।
> प्रशासनिक सेवाओं और व्यावसायिक पाठ्यक्रम के प्रशिक्षण के लिए अनुदान मिलेगा।
> युवाओं को खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों में अनुदान मिलेगा और छात्रवृत्तियों के लिए विशेष प्रावधान होगा।
> पुण्यार्थ, प्राणी सेवार्थ, शिक्षा आदि के लिए दिया जाने वाला दान व धन कर से मुक्त होगा।
> आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक स्थिति के सर्वेक्षण के आधार पर रोजगारपरक योजनाओं का लाभ मिलेगा।
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जैन समाज नवयुवक मंडल बाहुबली कॉलोनी के सचिव प्रफुल्ल जैन ने बताया कि अब युवाओं को छात्रवृत्ति, उच्चशिक्षा, दक्षता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम, कम्प्यूटर-अंग्रेजी प्रशिक्षण कार्यक्रम, आईएएस आदि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारियों के लिए अनुप्रति योजना का लाभ उठाना होगा। सरकार की सभी जरूरी योजनाओं का फायदा उठाना चाहिए।
बाहुबली जैन समाज के पूर्व अध्यक्ष शंकरलाल जैन ने कहा कि अल्पसंख्यक का दर्जा मिलने के बाद अब यह युवाओं पर निर्भर करता है कि वे संवैधानिक संरक्षण का दूरगामी लाभ किस तरह से उठा पाते हैं। प्रावधान तो बहुत होते हैं लेकिन समय रहते उनका समाज के हित में उपयोग करने के लिए मिलजुल कर कार्ययोजना बनानी होगी।
बरसों पुरानी मुराद पूरी होने का शहर में स्वागत
बांसवाड़ा. जैन समाज द्वारा पिछले लंबे समय से की जा रही अल्पसंख्यक वर्ग का दर्जा दिए जाने की मांग कानूनी तौर पर माने जाने और अध्यादेश जारी करने के बाद अब जैन समाज को संवैधानिक संरक्षण मिलेगा। अब तक देश में मुसलमान, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी समाज को अल्पसंख्यक वर्ग का दर्जा प्राप्त था, वहीं अब देशभर के 50 लाख जैन समाज के लोगों को 27 जनवरी को अध्यादेश जारी होने से अल्पसंख्यक वर्ग का दर्जा मिल चुका है। इस संबंध में 20 जनवरी को केंद्र सरकार द्वारा मंजूरी दे दी गई थी। जैन समाज के लोगों का मानना है कि उनका समाज अपने आप में पूर्णतया संपन्न है। जैन धर्म को अल्पसंख्यक के रूप में आरक्षण नहीं संरक्षण की जरूरत है। अल्पसंख्यक की मान्यता के निर्णय से जैन धर्म की देव, गुरु, संस्कृति, लिपि और पूजा पद्धति को संवैधानिक संरक्षण मिलेगा और सुरक्षा भी मिलेगी। शहर के जैन समाज के मौजिज लोगों से बातचीत पर आधारित भास्कर की विशेष रिपोर्ट-
खांदू कॉलोनी के बाशिांदे और जैन समाज के सक्रिय सदस्य शरद जैन का मानना ऐसा है कि जैन समाज संपन्न और सक्रिय समाज है। जिसे आरक्षण से ज्यादा संवैधानिक संरक्षण की जरूरत है। अब समाज को मौजूदा दौर में अपनी राजनीतिक और सामाजिक हैसियत बढ़ाए जाना समाज की मांग है।
युवा व्यवसायी संजय जैन ने कहा कि अब जैन समाज के युवा आईटीआई,आईआईएम आदि कोर्स के लिए राज्य से बाहर प्रवेश लेने पर मकान किराया पुनर्भरण के हकदार होंगे। इसके लिए उन्हें कुछ शर्तों का भी पालन करना होगा। साथ ही कलेक्टर की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली त्रैमासिक बैठक में भी अपनी सक्रिय भागीदारी रखनी होगी।
ट्रैवल्स व्यवसायी अंकित बोहरा बताते हैं कि कोरे आरक्षण से ही भला नहीं हो सकता है। समाज को जागरूक होने की भी जरूरत है। भारत सरकार के 15 सूत्रीय कार्यक्रम अंतर्गत राष्ट्रीय बैंकों से स्वरोजगार के लिए ऋण योजनाओं पर विशेष ध्यान देना होगा। जिससे कि युवा रोजगारपरक कार्यक्रमों से जुड़ सकें।
बांसवाड़ा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष आदेश्वर जैन के अनुसार अल्पसंख्यक वर्ग का दर्जा दिए जाने से बरसो पुरानी मुराद पूरी हुई है। अब समाज की शैक्षणिक संस्थाएं अपनी शर्तों पर संचालित की जा सकेंगी और उन्हें आरक्षण संबंधी दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा। वहीं नई शिक्षण संस्थाओं के लिए सहजता से भूमि मिल सकेगी।
श्रीश्रीमाल जैन सेठिया समाज के एडवोकेट कन्हैयालाल जैन ((सेठिया)) ने कहा कि जैन समाज को अल्पसंख्यक का दर्जा 20 वर्षों पूर्व दिया जाता तो देशभर में जैन समाजबंधु अब तक प्रशासनिक, राजनीतिक व दूसरे क्षेत्रों में कहीं अधिक तरक्की कर जाते। आज भी देश के सर्वोच्च पदों पर इस समाज को आसीन किए जाने की जरूरत है।
मेवाड़-वागड़ प्रांतीय दशा नरसिंहपुरा दिगंबर जैन महासभा के अध्यक्ष व मुनिसेवा संघ समिति के सचिव महावीर बोहरा ने कहा कि जैन समाज को अल्पसंख्यक का दर्जा काफी पहले दिया जाना था। लेकिन अब जब ये मांग पूरी हो चुकी है, तो इसके समाज में सामाजिक, शैक्षणिक, राजनीतिक उन्नति की दृष्टि से बेहतर परिणाम सामने आएंगे। लोगों को भी जागरूक रहना होगा।
पहले विरोध के चलते पारित नहीं हुआ बिल
केंद्रीय कैबिनेट की ओर से जैन समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा देने का निर्णय कई मायने में महत्वपूर्ण है। समाज के लोगों का कहना है कि वर्ष 1996 में एचडी देवगौड़ा सरकार ने ऐसा निर्णय किया था, लेकिन उनके घटक दलों के विरोध से बिल पारित नहीं हो पाया और मामला टल गया था। लेकिन इस बार 2014 में केंद्र की यूपीए सरकार में शामिल अधिकतर घटक दलों की अपनी राज्य सरकारों ने तो पहले से ही दर्जा दे रखा है। इससे सहमति बनने में दिक्कत नहीं आ पाई।
इन राज्यों में पहले से हैं अल्पसंख्यक
झारखंड, पंजाब, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, असम, पश्चिमी बंगाल, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु में पहले से अल्पसंख्यक हैं।
सरकारी हस्तक्षेप से मुक्त होगी संस्थाएं
समाजबंधुओं का मत है कि जैन समुदाय के मंदिर, ट्रस्ट, धार्मिक संस्थाएं एवं शैक्षणिक गतिविधियां जैसे स्कूल, कॉलेज सरकारी हस्तक्षेप से मुक्त हो जाएंगी। अब तक इन संस्थाओं में कई अवसरों पर सरकार का दखल होता था। अल्पसंख्यक का दर्जा मिलने के बाद जैन समुदाय अपने स्तर पर संस्थाओं को अपने कायदे से संचालित करेगा, जिससे समाज के सभी वर्गों को उसका सीधा लाभ मिलेगा। शिक्षण संस्थानों का जैन समाज के लोग स्वतंत्रतापूर्वक संचालित कर सकेंगे।
युवा वर्ग को कॅरिअर बनाने के रास्ते खुलेंगे
समाज को अल्पसंख्यक का दर्जा मिलने के बाद समाज के युवा को अपना कॅरिअर बनाने और लक्ष्य प्राप्त करने में सुविधा मिलेगी। प्रशासनिक सेवाओं और व्यावसायिक पाठ्यक्रम, खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों का युवाओं को लाभ मिलेगा। साथ ही युवाओं को छात्रावास सुविधा, छात्रवृत्ति का लाभ, स्कॉलरशीप, प्रशिक्षण के अवसर मिलेंगे और रोजगारपरक योजनाओं में सीधा लाभ मिलेगा। इससे समाज के युवाओं को प्रोत्साहन मिलेगा। वे प्रशासनिक सेवाओं में भी लाभ उठा सकेंगे।
> जैन धर्म की सुरक्षा होगी।
> जैन धर्म की नैतिक शिक्षा पढ़ाने का जैन स्कूलों को अधिकार होगा।
> जैन कॉलेजों में समाज के बच्चों को 50 प्रतिशत आरक्षित सीटें मिलेंगी।
> कम ब्याज पर लोन, व्यवसाय व तकनीकी शिक्षा उपलब्ध होगी।
> धार्मिक स्थल, संस्थाएं, मंदिर, तीर्थ क्षेत्र एवं ट्रस्ट अधिग्रहण नहीं होंगे और समुचित विकास एवं सुरक्षा के व्यापक प्रबंध होंगे।
> जैन मंदिरों, तीर्थ स्थलों, शैक्षणिक संस्थाओं इत्यादि का प्रबंध समुदाय कर सकेगा।
> जैन धर्मावलंबी अपनी प्राचीन संस्कृति, पुरातत्व एवं धर्म स्थानों का सरंक्षण कर सकेंगे।
> प्रशासनिक सेवाओं और व्यावसायिक पाठ्यक्रम के प्रशिक्षण के लिए अनुदान मिलेगा।
> युवाओं को खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों में अनुदान मिलेगा और छात्रवृत्तियों के लिए विशेष प्रावधान होगा।
> पुण्यार्थ, प्राणी सेवार्थ, शिक्षा आदि के लिए दिया जाने वाला दान व धन कर से मुक्त होगा।
> आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक स्थिति के सर्वेक्षण के आधार पर रोजगारपरक योजनाओं का लाभ मिलेगा।
अल्पसंख्यक का दर्जा मिलने से ये होंगे लाभ
जैन समाज का हर दृष्टि से विकास होगा: आर्यिका माताजी
भारत सरकार द्वारा जैन समाज को अल्पसंख्यक घोषित किए जाने से ये साबित हो रहा है कि जैन धर्म का अपना एक अलग और स्वतंत्र अस्तित्व है। दूसरा इससे जैन समाज के धार्मिक एवं शैक्षणिक संस्थानों को संविधान द्वारा प्रदत्त संरक्षण मिलेगा। जैन धर्म के सर्वोच्च गुरुवर आचार्य विद्यासागर महाराज द्वारा समाज की पताका फहराते हुए कई जिनालयों, धार्मिक व शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना की है, जिनका उन्नयन हो रहा है। अल्पसंख्यक घोषित करने से जिनालयों, धार्मिक व शैक्षणिक संस्थानों को शासन का सहयोग मिलेगा व साथ ही सुरक्षा भी प्राप्त होगी।
((जैसा कि आर्यिका पूर्णमति माताजी ने मंगलवार को भास्कर को बताया।))