‘शांति के लिए कामनाएं त्यागें’
भास्कर न्यूज क्चभीलवाड़ा
आचार्य राजाराम महाराज ने कहा कि संसार में संयोग और वियोग दो अलग-अलग क्रियाएं हैं। आप और हम मिले तो संयोग तथा अलग हुए तो वियोग। दोनों में वियोग प्रबल होता है। शांति के लिए व्यक्ति को कामनाओं का त्याग करना जरूरी होता है। क्योंकि कामनाएं कभी समाप्त नहीं होती हैं। इसलिए उसे शांति नहीं मिलती है। वे बुधवार को वृंदावनधाम आजादनगर में चल रही शिवमहापुराण कथा में बोल रहे थे। जय मेवाड़ सेवा संस्थान, राधा-माधव सेवा संस्थान, राधा-रानी महिला मंडल, भागवत प्रचार मित्र मंडल व राधे-राधे रामायण मंडल के तत्वावधान में चल रही कथा में बुधवार को आचार्य ने बाणासुर की तपस्या, शिव द्वारा वर प्राप्ति सहित अन्य प्रसंगों का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि हमारा संबंध संसार से नहीं परमात्मा से होना चाहिए। सांसारिक सुखों और दुखों को त्यागने से ही परमात्मा की प्राप्ति होती है। कथा के बीच आचार्य द्वारा प्रस्तुत भजन ओ बम बम भोला लहरी पर श्रद्धालु भाव विभोर होकर नृत्य
करने लगे।