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रिपोर्ट में देरी, आरोपी दोषमुक्त सरकार को क्षतिपूर्ति का आदेश
भास्कर न्यूज क्चभीलवाड़ा
विशिष्ट न्यायालय एनडीपीएस मामलात के न्यायाधीश प्रवीर भटनागर ने मादक पदार्थ की तस्करी के मामले में एफएसएल रिपोर्ट देरी से आने पर दो आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। राज्य सरकार को दोनों को डेढ़-डेढ़ लाख रुपए क्षतिपूर्ति राशि देने के आदेश दिए। जिसकी प्रति मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक आदि को भेजी है।
प्रकरण के अनुसार 2 नवंबर 2011 को भीमगंज थाना पुलिस ने गश्त के दौरान तिलकनगर में मंगल पांडे सर्किल के पास से शंका के आधार पर प्रतापगढ़ के जैनुद्दीन पुत्र अबीद्दीन को रोक तलाशी ली। तलाशी में उसकी पेंट की जेब में पॉलीथिन में 31 ग्राम 170 मिलीग्राम स्मैक मिली। पुलिस ने उसे एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तार किया। मामले में प्रतापगढ़ के ही शब्बीर शेख को भी गिरफ्तार किया गया। दोनों को जेल भेजा गया। अदालत को दो साल बाद मादक पदार्थ की जांच रिपोर्ट मिली, जिसमें उक्त पदार्थ स्मैक होना नहीं पाया गया। इसे अदालत ने गंभीरता से लेते हुए कहा कि दो साल तक जैनुद्दीन व शब्बीर शेख बेवजह जेल में रहे। इस पर कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि दोनों को क्षतिपूर्ति के रूप में राजकोष से डेढ़-डेढ़ लाख रुपए दिए जाएं।
समय पर मिले एफएसएल रिपोर्ट
अदालत ने अपने आदेश में टिप्पणी की है कि एफएसएल रिपोर्ट समय पर नहीं मिलने से सुनवाई में देरी होती है। ऐसे में सरकार का दायित्व है कि वे राज्य स्तर पर रासायनिक प्रयोगशाला खोलें ताकि लंबित प्रकरणों का जल्द निस्तारण हो सकें। प्रस्तुत प्रकरण में आरोपियों को करीब दो साल जेल में रहना पड़ा। यदि एफएसएल रिपोर्ट जल्द मिल जाती तो दोनों को लंबे समय तक जेल में नहीं रहना पड़ता। इस प्रकरण में जांच अधिकारी की उपेक्षा तो रही ही है। सरकार भी अपने उत्तरदायित्व से मुक्त नहीं हो सकती। कोर्ट ने सरकार को दोनों को क्षतिपूर्ति राशि देने के आदेश दिए।
कई बार लिखे पत्र
विशिष्ट लोक अभियोजक प्रणवीर सिंह आसिया का कहना है कि एफएसएल रिपोर्ट को लेकर कई बार पुलिस को पत्र लिखे गए। मौखिक तौर पर भी कहा, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट मंगाने में तत्परता नहीं दिखाई। जिसके चलते जैनुद्दीन व शब्बीर शेख को दो साल तक जेल में
रहना पड़ा।