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झाडिय़ों में फेंका नवजात, अस्पताल में हुई मौत

7 वर्ष पहले
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भीलवाड़ा। जन्म के बाद नवजात को झाडिय़ों में फेंक देने की एक और घटना जिले में रविवार को हुई। शरीर पर बिना किसी कपड़े के सर्दी में ठिठुरते इस नवजात की जिला अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। यह घटना जिले के घोडास गांव में हुई। इस महीने की ऐसी यह दूसरी घटना है।

बाल कल्याण समिति अध्यक्ष डॉ. सुमन त्रिवेदी ने बताया कि घोडास से समेलिया जाने वाले कच्चे रास्ते पर रविवार दोपहर करीब डेढ़ बजे राहगीरों ने एक नवजात को झाडिय़ों में बिलखता देखा। गोबर से सने नवजात के शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था। सर्दी से उसकी हालत काफी बिगड़ी हुई थी। कांटों से उसके शरीर पर कई जख्म हो गए थे।

ग्रामीणों ने सरपंच कमलेश गुर्जर के जरिए मांडल पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने दोपहर करीब ३ बजे नवजात को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। ३ घंटे मौत से संघर्ष करने के बाद शाम ६ बजे उसने दम तोड़ दिया।

10-12 घंटे पहले जन्मा

डॉक्टरों का कहना है कि नवजात का जन्म 10 से 12 घंटे पहले ही हुआ था। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस अब नवजात को जन्म देने वाली महिला की तलाश में जुटी हुई है।

18 दिन में दूसरी घटना

जनवरी महीने में ही ऐसी यह दूसरी घटना है, जब किसी नवजात को जन्म के बाद झाडिय़ों में फेंक दिया गया है। इससे पहले 10 जनवरी की देर रात रायला के देवाखेड़ा में एक महिला ने नवजात को जन्म देने के बाद सर्द रात में बाड़े में फेंक दिया था। हालांकि ग्रामीणों ने इस नवजात को बचा लिया था।

समिति को नहीं सूचना

मांडल पुलिस ने घोडास-समेलिया मार्ग पर मिले नवजात की सूचना बाल कल्याण समिति को नहीं दी थी। यह कहना है समिति अध्यक्ष त्रिवेदी का। उन्होंने बताया कि पुलिस नवजात को जिला अस्पताल में भर्ती कराने के बाद सीधे मांडल लौट गई।

महिला पर मुकदमा

मांडल थाना प्रभारी अजित सिंह ने बताया कि इस मामले में अज्ञात महिला के खिलाफ सरपंच कमलेश गुर्जर की रिपोर्ट पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।