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रोज 10 लाख का पोषाहार फिर भी 638 बच्चे अतिकुपोषित
जसराज ओझा - भीलवाड़ा
कुपोषण का शिकार हुए मारवों का खेड़ा के राजू को तो प्रशासन नहीं बचा सका, परंतु जिले में ऐसे कई बच्चे हैं, जिन्हें उपचार की दरकार है। महिला एवं बाल विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिलेभर में 638 बच्चे अतिकुपोषित हैं। जिन्हें पोष्टिक पंजीरी खिलाई जा रही है। विभाग की ढिलाई के नतीजतन मात्र 88 बच्चों को ही रैफर कर उपचार कराया गया है। इन अतिकुपोषित बच्चों की मौजूदा स्थिति की जानकारी भी विभाग के पास उपलब्ध नहीं है।
अतिकुपोषित बच्चों में सबसे ज्यादा 199 बच्चे सुवाणा ब्लॉक के रहने वाले हैं। 638 बच्चों में से 423 को ही बाल विकास विभाग की योजनाओं के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों पर खाना-पीना मिल रहा है। इन बच्चों को महात्मा गांधी जिला अस्पताल में बने एमटीसी वार्ड में रैफर करने का प्रावधान है, परंतु अब तक इनमें से 88 बच्चों को रैफर कर उपचार कराया गया है। अभी जिले में 1,945 आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं। इन पर एक लाख 65 हजार 34 बच्चे पंजीकृत हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में एक लाख 36 हजार 349 बच्चों को ही पूरक पोषाहार दिया जा रहा है।
स्वयंसेवी संगठन भी बेपरवाह
शहर में आए दिन स्वयंसेवी संगठनों द्वारा जरूरतमंद बच्चों को खाद्य सामग्री वितरित करने का दावा किया जाता है। कहीं जर्सी-स्वेटर तो कहीं स्टेशनरी बांटने का कार्यक्रम रखा जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि जिले में बच्चों की वास्तविक स्थिति से सब अनजान हैं। सरकारी खानापूर्ति के तहत हर माह बच्चों का वजन कर देखा जाता है कि कहीं कुपोषित तो नहीं हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार हर माह 18 से 20 हजार बच्चे कुपोषित की श्रेणी में आते हैं। इन बच्चों को सही देखभाल व पोष्टिक आहार की जरूरत होती है, लेकिन सामाजिक संगठनों को भी धरातल की स्थिति मालूम नहीं है।
कहां कितने बच्चे अतिकुपोषित
ब्लॉक बच्चे ब्लॉक बच्चे
आसींद 58 बनेड़ा 27
भीलवाड़ा 41 हुरड़ा 12
जहाजपुर 8 कोटड़ी 35
मांडल 19 मांडलगढ़ 131
सहाड़ा 44 शाहपुरा 64
सुवाणा 199
पैरेंट्स नहीं भेजते, हम जिम्मेदार नहीं
महिला एवं बाल विकास विभाग की उपनिदेशक दया सक्सेना का कहना है कि जिले में स्थिति नॉर्मल है, अतिकुपोषित बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों से रैफर किया जाता है। इनके पैरेंट्स उन्हें अस्पताल में भर्ती नहीं कराते हैं, इसका तो विभाग क्या कर सकता है। उनका कहना है कि विभाग के नियमों के तहत जो बच्चे ग्रेड 4 में आते हैं, उन्हें ही रैफर किया जाता है। प्रशासन गांवों के संग अभियान में ऐसे बच्चों को रैफर किया, परंतु इलाज ही नहीं कराया।
हर रोज 10 लाख रुपए का पोषाहार
जिले में पंजीकृत बच्चों को प्रतिदिन मिल रहे पोषाहार पर करीब दस लाख रुपए खर्च हो रहे हैं। विभाग के अनुसार छह माह से तीन वर्ष तक के अतिकुपोषित बच्चे को प्रतिदिन 125 ग्राम पंजीरी अथवा 240 ग्राम हलवा खिलाया जाता है। इसी तरह तीन से छह वर्ष तक के अतिकुपोषित बच्चे को 51 ग्राम हलवा, 42 ग्राम उपमा का नाश्ता व खिचड़ी या दलिया खिलाया जाता है। इसके लिए प्रति बच्चे दस रुपए का बजट निर्धारित है।
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स्वयंसेवी संगठन भी बेपरवाह
शहर में आए दिन स्वयंसेवी संगठनों द्वारा जरूरतमंद बच्चों को खाद्य सामग्री वितरित करने का दावा किया जाता है। कहीं जर्सी-स्वेटर तो कहीं स्टेशनरी बांटने का कार्यक्रम रखा जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि जिले में बच्चों की वास्तविक स्थिति से सब अनजान हैं। सरकारी खानापूर्ति के तहत हर माह बच्चों का वजन कर देखा जाता है कि कहीं कुपोषित तो नहीं हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार हर माह 18 से 20 हजार बच्चे कुपोषित की श्रेणी में आते हैं। इन बच्चों को सही देखभाल व पोष्टिक आहार की जरूरत होती है, लेकिन सामाजिक संगठनों को भी धरातल की स्थिति मालूम नहीं है।
कहां कितने बच्चे अतिकुपोषित
ब्लॉक बच्चे ब्लॉक बच्चे
आसींद 58 बनेड़ा 27
भीलवाड़ा 41 हुरड़ा 12
जहाजपुर 8 कोटड़ी 35
मांडल 19 मांडलगढ़ 131
सहाड़ा 44 शाहपुरा 64
सुवाणा 199