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मौसम बढ़ाएगा पैदावार

7 वर्ष पहले
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ज्ञानप्रकाश दाधीच - भीलवाड़ा
इस बार की सर्दी फसलों के लिए काफी फायदेमंद रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अब तक पूरे सीजन में मौसम फसलों के काफी अनुकूल रहा। इससे खाद्यान्न, दलहन और तिलहन की पैदावार पहले के आकलन की तुलना में बढऩे के आसार हैं।
गेहूं, सरसों, चना व जौ में आकलन के मुताबिक उत्पादन दस से बारह फीसदी तक और बढ़ सकता है। यानी करीब 50 हजार मीट्रिक टन उत्पादन बढऩे की संभावना है। खासकर जनवरी में लगातार कोहरे के असर व बीच में हुई बारिश के कारण फसल को सिंचाई मिली व तापमान अनुकूल रहा। कड़ाके की ठंड के बीच पाला नहीं पड़ा। मौसम अनुकूल रहने के कारण गेहूं की गुणवत्ता में काफी वृद्धि होगी, इसका दाना और मोटा व गुणवत्तायुक्त होगा। कृषि वैज्ञानिक ((पौध व्याधि)) डॉ. ललित छाता ने बताया गेहूं की फुटान इस अनुकूल मौसम में अच्छी होती है। वहीं सरसों में भी कीट प्रकोप काफी हद तक नियंत्रित रहा।
महीने में 128 घंटे चमका सूरज
जनवरी में एक दिन में लगभग 57 एमएम बारिश हुई। वहीं इस सीजन में करीब 20 दिन कोहरे का भी असर रहा। पूरे माह में सूरज सिर्फ 128 घंटे चमका। पूरे माह में सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय लगभग 300 घंटे का रहा। यानी सूरज की चमक सूर्योदय से सूर्यास्त तक इस माह आधी से भी कम रही। बारानी कृषि अनुसंधान केंद्र स्थित सन शाइन रिकॉर्डर पर सूर्य की चमक रिकॉर्ड की जाती है। 3, 4, 21 व 22 जनवरी को सूरज की चमक बिल्कुल दर्ज नहीं हुई, बादल व कोहरे का असर रहा। वहीं 5 जनवरी को 1.08 घंटा, 11 जनवरी को दस मिनट, 18 को एक घंटा ही चमका सूरज। शेष दिन भी ऐसे ही रहे। तापमान भी अधिकांश दिन 5 से 7 डिग्री सेल्सियस रहा। तापमान के लगातार कम रहने के बावजूद पाला नहीं पड़ा।
गेहूं के लिए सबसे उपयुक्त मौसम
गेहूं बुवाई 1.12 लाख हैक्टेयर में हुई और इसका उत्पादन अब तक 3.94 लाख मीट्रिक टन होने की संभावना व्यक्त की गई थी, लेकिन यह मौसम खासकर गेहूं की फसल के बहुत अनुकूल रहा। न्यूनतम तापमान के अधिकांश दिन 5 से 7 डिग्री सेल्सियस रहने से इस फसल को काफी फायदा पहुंचा है। अनुकूल मौसम से गेहूं का दाना मोटा और अधिक गुणवत्तायुक्त होगा। इसका उत्पादन 3.94 लाख मीट्रिक टन के प्रारंभिक अनुमान के बाद अब 4 लाख 20 हजार मीट्रिक टन तक पहुंच सकता है।
जौ : जौ बुवाई 27 हजार 910 हैक्टेयर में हुई, जिसके मुताबिक उत्पादन 77 हजार 590 मीट्रिक टन का आकलन था। यह अब दस फीसदी बढ़कर करीब 85 हजार मीट्रिक टन पहुंच सकता है।
सरसों : सरसों की बुवाई भी इस बार 51 हजार 150 हैक्टेयर में हुई। जिसके मुताबिक 71 हजार 610 मीट्रिक टन उत्पादन का आकलन था। जो दस से बारह फीसदी बढ़कर करीब 80 हजार मीट्रिक टन पहुंच सकता है।
चना : चना बुवाई 36 हजार 210 हैक्टेयर में हुई और उत्पादन 38 हजार 21 मीट्रिक टन होने का आकलन रहा। जो अब बढ़कर 41 हजार मीट्रिक टन तक पहुंच सकता है।
जीरा में नमी ने पहुंचाया नुकसान
जहां खाद्यान्न, दलहन व तिलहन में मौसम अनुकूल रहा। वहीं जीरा फसल को अधिक नमी के कारण नुकसान पहुंचा है। जिले में करीब साढ़े तीन हजार हैक्टेयर में जीरा बोया गया है। नुकसान दस फीसदी तक संभव है। उद्यान विभाग के कार्यवाहक सहायक निदेशक के अनुसार, इस मौसम में इस फसल को रोगों ने नुकसान पहुंचाया है।
सिंचाई की बचत
एक हैक्टेयर में सिंचाई करने की लागत करीब 1200 रुपए तक आ जाती है। ऐसे में इस सीजन में बारिश ने एक सिंचाई की कमी पूरी कर दी। वहीं कोहरे के कारण बनी नमी से भी काफी फायदा पहुंचा।