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वाटरशेड के पैसों से नहीं बनेंगे जाति-धर्म के श्मशान

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - भीलवाड़ा
वाटरशेड ((जलग्रहण)) प्रोजेक्ट के पैसों से जाति-धर्म या समाज के श्मशान घाट नहीं बनाए जा सकेंगे। अभी ऐसे कई काम एकीकृत जलग्रहण प्रबंधन कार्यक्रम ((आईडब्ल्यूएमपी)) में हो रहे हैं। इस योजना में न उनका जीर्णोद्धार हो सकेगा, न विकास करवाया जाएगा। जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण निदेशालय ने यह आदेश
जारी किए हैं।
निदेशक एमएस काला ने जिला परिषद के वाटरशेड प्रोजेक्ट मैनेजर को स्पष्ट कहा है कि राज्य के अधिकतर जिलों में अभी आईडब्ल्यूएमपी के तहत वाटरशेड एरिया में जातियों के अनुसार काम हो रहे हैं। आईडब्ल्यूएमपी के काम आम व्यक्ति के लिए है, न कि जाति, धर्म या संप्रदाय विशेष के लिए। अब जिन भी श्मशान घाट का निर्माण, रिनोवेशन या विकास करवाया जाए, वह आम व्यक्ति के हित में बिना किसी भेदभाव के होना चाहिए। उधर, एक्सईएन ((वाटरशेड)) घनश्याम डाड का कहना है कि हमने जो काम स्वीकृत किए हैं, वे सभी पुराने हैं। नए काम नए आदेश के अनुसार ही करवाए जाएंगे।
21 श्मशान घाट पर 50 लाख के काम
जिले में वाटरशेड प्रोजेक्ट में वित्त वर्ष2012-13 में 21 काम श्मशान घाट विकास के स्वीकृत हुए। चारदीवारी व टीनशेड के इन कामों पर 49.96 लाख रुपए मंजूर हुए थे। अधिकतर श्मशान एससी-एसटी के हैं। सर्वाधिक 8 काम शाहपुरा क्षेत्र की अरनिया घोड़ा, रहड़, हुकमपुरा, डोहरिया, कनेछनखुर्द, कनेछनकला ग्राम पंचायत में हैं। इन पर 16.89 लाख रुपए खर्च होंगे।इसी तरह हुरड़ा में सात काम आगंूचा, कोटड़ी, हुरड़ा, लांबा, गागेड़ा पंचायत में 20 लाख रुपए तथा आसींद क्षेत्र में छह संग्रामगढ़, परा, जगपुरा, अंटाली, आकड़सादा में 13.07 लाख रुपए के काम हैं। कुछ काम पूरे भी हो गए हैं तो कुछ चालू हैं।