स्कूलों में नहीं पोषाहार के बर्तन
भास्कर न्यूज - भीलवाड़ा
जिले के 3,511 सरकारी स्कूलों में बच्चों को पोषाहार खिलाने के लिए न पूरे बर्तन हैं और न ही सभी जगह रसोईघर बने हुए हैं। कई स्कूलों में बर्तन भी दूसरों से मंगाकर काम चला रहे हैं। रसोई घर के अभाव में कई स्कूलों में पोषाहार बनाने के लिए छप्पर बना रखा है। जबकि पंचायतीराज विभाग ने रसोईघर व बर्तन के लिए बजट भी दे रखा है। सर्वशिक्षा अभियान व स्थानीय शिक्षा अधिकारी इसे लेकर गंभीर नहीं है।
जिले में वर्ष 2012-13 में केवल 1,134 रसोईघर ही स्वीकृत हुए, इनमें से 890 बन गए। 189 स्कूलों में कार्य अधूरा है, जबकि 55 में काम ही शुरू नहीं हुआ है। विभाग ने जिले में 2,077 स्कूलों में 60 हजार रुपए प्रति स्कूल रसोईघर बनाने तथा एक हजार स्कूलों में 90 हजार रुपए प्रति स्कूल के हिसाब से बजट दिया था, लेकिन रसोईघर बनाने की स्वीकृति ही जारी नहीं की गई। जिले में अभी कितने रसोईघर बने हैं, इसकी सूचना कंपलीट नहीं है। पंचायतीराज विभाग की शासन सचिव अपर्णा अरोरा की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि भीलवाड़ा से फरवरी 2011 के बाद रसोईघर के संबंध में कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है। डीईओ प्रारंभिक जीवराज जाट के अनुसार, एसएसए अधिकारियों से चर्चा कर जल्द ही स्कूलों में रसोईघर बनाने व बर्तन खरीद तय की जाएगी।
3 साल से पड़े हैं 75 लाख रुपए
सरकारी स्कूलों में बर्तन खरीद के लिए जिले में वर्ष 2009-10 में 75 लाख रुपए का बजट मिला था। तीन बार टेंडर हुए, परंतु स्कूलों में पोषाहार के लिए बर्तन की खरीद नहीं हो सकी। जबकि इसके लिए एक कमेटी भी बनी थी। अब विभाग ने निर्देश दिए हैं कि जिला स्तर पर खरीद नहीं की जाए और प्रति स्कूल पांच हजार रुपए का बजट दे दिया जाए, ताकि स्कूल प्रबंध समिति द्वारा बर्तन खरीद की जा सके, लेकिन यह पैसा अभी स्कूलों में नहीं पहुंचा है।
15 फरवरी तक बनाओ रसोईघर
जिले में मिड डे मील आयुक्तालय द्वारा 3,077 रसोईघर स्वीकृत हैं। इनमें से अभी तक 890 ही बने हैं। 189 में अधूरा काम है। विभाग ने अब 60 दिन की कार्ययोजना में 19 स्कूलों में रसोईघर बनाने के निर्देश दिए हैं। इसी तरह 3,568 स्कूलों में बर्तन खरीदने की स्वीकृति दे रखी है। अभी तक 1,372 स्कूलों में बर्तन उपलब्ध करा रखे हैं। अब विभाग ने 2,196 स्कूलों में 15 फरवरी तक बर्तन खरीदने के निर्देश दिए हैं।