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पोस्टऑफिस में बंट रही है पेंशन

7 वर्ष पहले
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ललित ओझा - भीलवाड़ा
पांच सौ रुपए महीना पेंशन के लिए ट्रेजरी व पोस्टऑफिस के कई चक्कर। फिर ठंड में सुबह सात बजे से पोस्टऑफिस के बाहर घंटों इंतजार। पोस्टमैन की झिड़कियां। इसके बाद भी गारंटी नहीं कि वृद्धावस्था, विधवा या निशक्त पेंशन का पैसा मिल ही जाए। सरकार के निर्देश हैं कि पेंशनर्स को पैसा मनीऑर्डर से घर पर मिले। उसे आना न पड़े, पर बुजुर्ग, निशक्त रोज चक्कर लगा रहे हैं। ऐसा नजारा हर रोज हेड पोस्टऑफिस में देखने को मिल रहा है।
सुबह सात बजे से ही हेड पोस्टऑफिस की खिड़की के बाहर बुजुर्ग पुरुष-महिलाएं व निशक्तजन आने लग जाते हैं। अधिकतर दिहाड़ी-मजदूरी करने वाले। कई ऐसे जिनसे चला भी नहीं जाता, पर आते हैं इस उम्मीद में कि उन्हें आज तो पेंशन मिल जाएगी। ढाई घंटे के इंतजार के बाद खिड़की खुलती है। पोस्टमैन उनसे नाम-पते पूछते हैं। कुछ को कहा जाता है-अभी आधा घंटा बैठो। कैश मिलेगा, तब देंगे। आधा घंटे बाद पोस्टमैन कैश लाता है और बांटता है। वहीं, कइयों को यह कहकर झिड़का दिया जाता है-तुम्हारी पेंशन नहीं आई।
दो विभागों में फंसे
मजबूर पेंशनर्स
मारुति नगर के 63 वर्षीय रियाज मोहम्मद अंसारी ((पीपीओ नंबर आरजे-एस-04174865)) कहते हैं कि उन्हें अक्टूबर से दिसंबर की पेंशन नहीं मिली। तीन-चार चक्कर लगाने के बाद पोस्टऑफिस ने दिसंबर का पैसा तो दे दिया। अक्टूबर, नवंबर की पेंशन ट्रेजरी से ही नहीं आना बताया, जबकि ट्रेजरी से मनीऑर्डर नंबर 986 से अक्टूबर तथा एमओ नंबर 745 से नवंबर की पेंशन भेजी गई। ट्रेजरी ने यह भी लिखकर दे दिया कि एमओ नहीं लौटाया है। फिर भी न पोस्टमैन मानने को तैयार, न पोस्टमास्टर। ऐसा ही विजय सिंह पथिक नगर के शांतिलाल पुत्र भूरालाल मुरोठिया ((पीपीओ नंबर आरजे-एस-05555783)) के साथ हुआ। मुरोठिया का कहना है कि ट्रेजरी से पेंशन भेज दी, पर पोस्टमैन नहीं दे रहा।
घर पर नहीं लाते, यहां
बुलाते हैं
दादाबाड़ी के निशक्त राधेश्याम पुत्र कालू खटीक का कहना है कि पोस्टमैन घर पर पेंशन नहीं लाते। घर लाने की कहो तो गुस्सा करते हैं। पोस्टऑफिस बुलाते हैं। कुर्सी-केनिंग का काम छोड़ सात दिन से रोज यहां आ रहा हूं। तब आज पैसा मिला है। कोली मोहल्ला ((सांगानेरी गेट)) की विमला बाई पत्नी रामराय कोली बोलीं-पांच सौ रुपए लेने तीन-तीन बार बुलाते हैं। घर देने नहीं आते। ठंड में सुबह सात बजे से यहां बैठी हूं। दस बजे से पहले पेंशन देते नहीं।
एक दिन साइन करो, दूसरे दिन पैसा मिलेगा
सांगानेरी गेट के बंशीलाल गांछा, बाहला की श्रीमती रूपा सुनार सहित अन्य महिलाओं का कहना है कि पोस्टमैन एक दिन तो साइन करने बुलाते हैं। फिर अगले दिन आने की कहते हैं। जरा सी देर हो जाए तो भगा देते हैं। दस बजे बाद भी नहीं देते।
अफसर सब जानते, पर
रोकते नहीं
पोस्टमास्टर गफ्फार खान हो या अन्य अफसर। डाक अधीक्षक एलएल मेघवाल। वे भी जानते हैं कि पोस्टमैन को पेंशनर्स को नहीं बुलाना चाहिए। यह गलत है, पर वे करते कुछ नहीं। वे बोले-रियाज का केस दिखवा लेंगे। पोस्टमैन को घर-घर जाकर पेंशन एमओ सहित अन्य डाक बांटने की तनख्वाह मिलती है। वे क्यों बुलाते हैं, पता लगाएंगे। उन्हें पाबंद करेंगे कि पेंशनर्स को पोस्टऑफिस नहीं बुलाएं।



:भीलवाड़ा. हेड पोस्ट ऑफिस परिसर में गुरुवार को पेंशन के पैसे बांटता पोस्टमैन।

४२२

पोस्टमैन

२,७०,०००

पेंशनर्स कुल

६४०

पेंशन एक के जिम्मे

२६

पेंशन रोज बांटे तो

हो काम पूरा

जिला फैक्टस