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वोट डालने के लिए बुजुर्ग भी जोश में

8 वर्ष पहले
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भीलवाड़ा. अपनी सरकार चुनने के लिए युवाओं के साथ ही बुजुर्गों भी जोश में है। उनके जोश और जज्बे के आगे उम्र व सेहत बाधा नहीं बन पाएगी। ऐसे ही कुछ बुजुर्गों से भास्कर ने बातकर जाना कि वे लोकसभा चुनाव में क्यों वोट देंगे? न्यू हाउसिंग बोर्ड शास्त्रीनगर की 90 वर्षीय कमलादेवी बैद कहती हैं कि तबीयत कैसी भी रहे, वोट डालने जरूर जाऊंगी। मैंने पोते जयकुमार से कहा है कि वोट देने ले जाना। सही सरकार बनेगी तो जनता के बारे में भी सोचेगी। शास्त्रीनगर की 83 वर्षीय राजू बाई कहती हैं कि हम प्रत्याशियों को परख कर मतदान करेंगे। कमजोर स्वास्थ्य के बावजूद बेटे या पौत्र की बहू का हाथ पकड़ कर मतदान केंद्र तक जाऊंगी। ऐसी पार्टी को वोट दूंगी, जो महंगाई से मुक्ति दिला सके।
वर्धमान कॉलोनी निवासी 89 वर्षीय शांतादेवी त्रिवेदी कहती हैं मेरे घुटने साथ नहीं देते फिर भी वोट देने जाऊंगी। मेरा वोट देश को मजबूती देगा। मैंनेपड़ोस के बच्चों से कहा है कि वे मुझे वोट दिलवाने जरूर ले जाएं। सेवानिवृत्त पब्लिक प्रोसिक्यूटर 88 वर्षीय देबीलाल सामरिया का कहना है कि मेरी सोच है कि कोई गलत व्यक्ति नहीं चुना जाना चाहिए। मैं यही सोचकर वोट दूंगा कि अच्छी सोच रखने वाला व्यक्ति सांसद बने।
कृषि उपज मंडी के सामने चर्च रोड निवासी 87 साल के गजमल शर्मा कहते हैं- मैं जब से वोट डालने लायक हुआ, तब से सरकार चुन रहा हूं। आंखों की रोशनी कम हो गई है पर बेटे के साथ हम पति-पत्नी वोट डालने जरूर जाएंगे। मैं भ्रष्टाचार मिटाने के लिए वोट दूंगा। तभी उनकी पत्नी श्रीमती लहरी देवी ((85 वर्ष)) बोलीं- औरतें महंगाई से त्रस्त हैं। घर का बजट गड़बड़ा गया है। इस बार महंगाई कम करने के लिए वोट देंगे। शास्त्रीनगर मेन सेक्टर के 85 वर्षीय सेवानिवृत्त प्रोफेसर गजराज जैन का कहना है कि वोट देना उनका कर्तव्य है। मैं चाहता हूं कि अच्छा व्यक्ति चुनकर संसद में जाए और मजबूत सरकार बने। तभी देश विकास करेगा और भ्रष्टाचार खत्म होगा। इसलिए मैं मतदान करुंगा।
संजय कॉलोनी के 85 वर्षीय ऊंकारलाल जोशी का कहना है कि मतदान मेरा अधिकार है तो प्राथमिक कर्तव्य भी। मुझे कम दिखाई देता है, इसके बावजूद स्थाई सरकार, प्रजातंत्र को सुरक्षित रखने व भ्रष्टाचार से मुक्ति के लिए मैं अपने बेटे या पौत्र के साथ जाकर मतदान करुंगा। आरके कॉलोनी निवासी 84 वर्षीय नंदूदेवी शर्मा बोलीं - मैं ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं हूं पर चाहती हूं कि सरकार अभी जो पेंशन दे रही है, इसे बढ़ाए ताकि घर का खर्चा चल सके। इसी उम्मीद में परिवार के साथ वोट देने जाऊंगी।



सेवानिवृत्त प्रोफेसर गजराज जैन का कहना है कि वोट देना उनका कर्तव्य है। मैं चाहता हूं कि अच्छा व्यक्ति चुनकर संसद में जाए और मजबूत सरकार बने। तभी देश विकास करेगा और भ्रष्टाचार खत्म होगा। इसलिए मैं मतदान करुंगा।

संजय कॉलोनी के 85 वर्षीय ऊंकारलाल जोशी का कहना है कि मतदान मेरा अधिकार है तो प्राथमिक कर्तव्य भी। मुझे कम दिखाई देता है, इसके बावजूद स्थाई सरकार, प्रजातंत्र को सुरक्षित रखने व भ्रष्टाचार से मुक्ति के लिए मैं अपने बेटे या पौत्र के साथ जाकर मतदान करुंगा। आरके कॉलोनी निवासी 84 वर्षीय नंदूदेवी शर्मा बोलीं - मैं ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं हूं पर चाहती हूं कि सरकार अभी जो पेंशन दे रही है, इसे बढ़ाए ताकि घर का खर्चा चल सके। इसी उम्मीद में परिवार के साथ वोट देने जाऊंगी।

बहू का हाथ पकड़ कर मतदान केंद्र तक जाऊंगी। ऐसी पार्टी को वोट दूंगी, जो महंगाई से मुक्ति दिला सके।

वर्धमान कॉलोनी निवासी 89 वर्षीय शांतादेवी त्रिवेदी कहती हैं मेरे घुटने साथ नहीं देते फिर भी वोट देने जाऊंगी। मेरा वोट देश को मजबूती देगा। मैंनेपड़ोस के बच्चों से कहा है कि वे मुझे वोट दिलवाने जरूर ले जाएं। सेवानिवृत्त पब्लिक प्रोसिक्यूटर 88 वर्षीय देबीलाल सामरिया का कहना है कि मेरी सोच है कि कोई गलत व्यक्ति नहीं चुना जाना चाहिए। मैं यही सोचकर वोट दूंगा कि अच्छी सोच रखने वाला व्यक्ति सांसद बने।

कृषि उपज मंडी के सामने चर्च रोड निवासी 87 साल के गजमल शर्मा कहते हैं- मैं जब से वोट डालने लायक हुआ, तब से सरकार चुन रहा हूं। आंखों की रोशनी कम हो गई है पर बेटे के साथ हम पति-पत्नी वोट डालने जरूर जाएंगे। मैं भ्रष्टाचार मिटाने के लिए वोट दूंगा। तभी उनकी पत्नी श्रीमती लहरी देवी ((85 वर्ष)) बोलीं- औरतें महंगाई से त्रस्त हैं। घर का बजट गड़बड़ा गया है। इस बार महंगाई कम करने के लिए वोट देंगे। शास्त्रीनगर मेन सेक्टर के 85 वर्षीय

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