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धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया का उल्लेख था एक्ट में
समसामयिक बीकानेर राज्य में बनाए गए और प्रभावी किए गए इस एक्ट को वर्तमान भारत सरकार की तत्संबंधी नीति के परिप्रेक्ष्य में भी विश्लेषित किया जा सकता है। इस एक्ट के द्वारा राज्य में प्रचलित धार्मिक सहिष्णुता की बाहरी हस्तक्षेप से रक्षा का उल्लेख करते हुए धर्म परिवर्तन करने वालों की सुरक्षा के लिए कानून निर्मित किए जाने का उल्लेख है। एक्ट में नाबालिग की आयु 21 वर्ष से कम मानी गई है। एक्ट के प्रारंभ में यह बात स्पष्ट की गई है कि धर्म परिवर्तन का अर्थ एक धर्म को त्याग कर दूसरे धर्म में जाने से है लेकिन एक संप्रदाय को छोड़कर दूसरे संप्रदाय में शामिल होने से नहीं है। उदाहरणार्थ यदि एक हिंदू धर्मावलंबी व्यक्ति शैव संप्रदाय का परित्याग कर वैष्णव संप्रदाय का मतावलंबी हो जाता है या एक शिया मुसलमान सुन्नी बन जाता है तो इसे धर्म परिवर्तन नहीं माना जा सकता है।
एक्ट में राज्य सरकार को यह अधिकार प्रदान किया गया है कि वह राज्य के किसी भी क्षेत्र विशेष में रजिस्ट्रार नियुक्त कर सकेगी। इस रजिस्ट्रार का एक ऑफिस होता था जिसमें धर्म परिवर्तन का एक रजिस्टर रखा जाता था। एक्ट के अंतर्गत धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को भी भलीभांति व्याख्यायित किया गया था। तदनुसार जो व्यक्ति धर्म परिवर्तन करना चाहता था उसे रजिस्ट्रार के ऑफिस में उपस्थित होकर एक शपथ-पत्र प्रस्तुत करना होता था कि मैं स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन कर रहा हूं। रजिस्ट्रार का यह कर्तव्य होता था कि वह इस संबंध में पूर्ण जांच कर ले कि व्यक्ति स्वेच्छा से कार्य कर रहा है अथवा नहीं? इसके लिए वह जिन्हें उचित समझें उन्हें बुलाकर उनके बयान ले सकता था अथवा जांच करा सकता था। ((लगातार))