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‘तपोधन से ही धनवान होता है साधु’

8 वर्ष पहले
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बीकानेर - आचार्य महाश्रमण ने कहा कि सबसे बड़ा मंगल धर्म है। धर्म के सामने सभी मंगल छोटे हैं। पदार्थों को भी मंगल के रूप में स्वीकार किया जाता है। धर्म के सामने सभी पदार्थ बौने पड़ जाते हैं। देवता भी उसको नमस्कार करते हैं जिसका मन हमेशा धर्म में लीन रहता है। महाश्रमण बुधवार को गंगाशहर प्रवेश के बाद तेरापंथ भवन में प्रवचन दे रहे थे। उन्होंने कहा कि अहिंसा, संयम और तप यह त्रिआयामी धर्म है। व्यक्ति के जीवन में यदि अहिंसा है तो संयम और तप भी मौजूद होंगे और संयम है तो अहिंसा व तप भी उपस्थित रहेंगे। उन्होंने कहा कि विचार करें कि अहिंसा का विकास आप में कितना हुआ है। आपको गुस्सा आता है या नहीं। आप आवेश में आकर डांटते-फटकारते हैं तो अभी तक आप में अहिंसा का विकास नहीं हुआ है। हिंसा पहले भीतर में उजागर होती है फिर बाहर प्रकट होती है। महाश्रमण ने कहा क साधु धनवान तभी होता है जब उसके पास तपोधन होता है। साधु को तपोधन भी कहते हैं। साधु के पास साधना है तो वह धनवान है। उन्होंने कि छोटे-छोटे तप के माध्यम से भी तप के धनी बन सकते हैं। मर्यादा महोत्सव के बारे में उन्होंने कहा कि इस बार वृहद मर्यादा महोत्सव है। वृहद इसलिए है क्योंकि साध्वी प्रमुखा तथा मंत्री मुनि सहित बड़ी संखा में साधु-साध्वी वृंद यहां विराजमान है। उन्होंने बताया कि तेरापंथ भवन में मुनि राजकरण, मुनि नगराज, साध्वी चंदनबाला का भी सान्निध्य प्राप्त होगा। प्रवचन से पहले नवकार महामंत्र का वाचन किया। तेरापंथ युवक परिषद, महिला मंडल, किशोर मंडल एवं कन्या मंडल आदि ने सामूहिक गीता के माध्यम से महाश्रमणजी का वंदन किया।ज्ञानशाला क बच्चों ने भी गीतिका प्रस्तुत की। 41वें दिन बड़ी तपस्या कर निराहार रहने वाले अजयप्रकाश की आचार्य महाश्रमण ने सुख-साता पूछी। दिनेश मुनि ने बताया कि सूर्योदय से पहले यहां मंगल पाठ होता है।मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र डाकलिया के अनुसार तेरापंथ भवन में प्रवचन प्रतिदिन सुबह 9.30 बजे शुरू होंगे और 11 बजे तक चलेंगे।रात सात बजे जे अर्हत वंदना व साढ़े सात बजे से महोत्सव संबंधी कार्यक्रम होंगे।