प्राकृतिक उपयोग से करें सुनियोजित खेती
बीकानेर - स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.ए.के.दाहमा ने कहा कि खेती में प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग जरूरी है। गुरुवार को कृषि अनुसंधान केन्द्र के सभागार में नीबूवर्गीय फसलों पर आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए कुलपति ने कहा कि टिकाऊ खेती में पानी का उपयोग करने में हम उतने सक्षम नहीं है जबकि सुनियोजित खेती इस समस्या का हल करने में सहायक है। उन्होंने कहा कि मूल्य संवद्र्धन में बहुत पीछे है जबकि ब्राजील तथा मलेशिया की अग्रणी देशों में गणना होती है।
उन्होंने पैदावार बढ़ाने के साथ मूल्य संवद्र्धन भंडारण तथा समय पर परिवहन सुविधा पर भी जोर दिया। नेशनल कमेटी ऑन प्लास्टिक कल्चर एप्लीकेशन इन हॉर्टीकल्चर एवं राजस्थान उद्यानिकी विकास समिति जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुई सेमिनार में अनुसंधान निदेशक डॉ.गोविंद ने कहा कि नीबू वर्गीय फलों के उत्पादन मामले में राजस्थान देश का सातवां स्थान है। दिनोंदिन घटते जल स्तर को देखते हुए प्लास्टिक कल्चर का महत्त्व बढऩे तथा अधिक पैदावार के साथ-साथ पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नोलॉजी की आवश्यकता पर जोर दिया। सिंह ने कहा कि नीबू वर्गीय फसलों में विटामिन सी की प्रचुर मात्रा होती है जो कि कैंसर जैसी घातक बीमारियों को रोकने में मददगार है। उन्होंने नई तकनीकी किसानों तक पहुंचाने की जरूरत बताई।
कार्यशाला प्रभारी डॉ.ए.के.सिंह ने बताया कि 17 विषय विशेषज्ञों की सहित सौ प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। जिसमें जलवायु, पर्यावरण, सूक्ष्म सिंचाई, प्लास्टिक कल्चर की सुनियोजित तकनीकी पर विशेष रूप से चर्चा होगी। कुलपति व अनुसंधान निदेशक ने कृषि संबंधी पुस्तक व फोल्डर का विमोचन भी किया। कार्यशाला को क्षेत्रीय निदेशक डॉ.एस.एल.गोदारा ने संबोधित किया। इस मौके पर विभिन्न विभागों के डीन-डायरेक्टर मौजूद थे।