सेक्रेट्री सा’ब कहां हैं सर, मीटिंग में
भास्कर न्यूज - बीकानेर
सर, सेक्रेट्री सा’ब नहीं आए क्या। नहीं, आए तो है। हो सकता है कलेक्टर साहब की मीटिंग में हो। या फिर इंस्पेक्शन में गए होंगे कलेक्टर के साथ। यूआईटी विकास कार्य भी तो बहुत करवा रही है। ऐसे में काम की गुणवत्ता भी तो देखनी पड़ती है। कुछ ऐसे ही जवाब मिलेंगे नगर विकास न्यास में सचिव का इंतजार करने वाले सैकड़ों लोगों को। सप्ताह में एक बार ही यह जवाब मिले तो कोई नहीं लेकिन ऐसा जवाब तो उन्हें सप्ताह में चार दिन मिलता है। बाकी के दिनों में दो दिन छुट्टी में निकल जाते है। ऐसे में पट्टा बनवाने सहित अन्य कार्यों के लिए आने वाले लोगों को सिवाय परेशानियों के कुछ नहीं मिलता।
नगर विकास न्यास के सचिव आमतौर पर कार्यालय में मिलते ही नहीं है। ऐसे में यूआईटी में आने वाले लोगों का समय पर काम नहीं होता। मुख्य तौर पर इन दिनों पट्टे बनवाने के लिए लोग दिनभर यूआईटी कार्यालय में भटकते रहते हैं। पट्टे की कार्रवाई में चालान से पूर्व सचिव के हस्ताक्षर जरूरी होते है। अगर साइन नहीं होते है तो चालान नहीं कटता।
इसी तरह भू-रूपांतरण, ठेकेदारों के बिल, रिफंड सहित अन्य कामों में भी सचिव के हस्ताक्षरों की जरूरत होती है। पब्लिक से जुड़े इस कार्यालय का मुखिया सीट पर नहीं मिलता ऐसे में मूलभूत सुविधाओं की मांग करने वालों को भी अपनी बात रखने में कई चक्कर निकालने पड़ते हैं। लोग जब भी सेक्रेट्री के बारे में पूछते है तो उन्हें रटे-रटाया जवाब मिलता है ‘सेक्रेट्री सा’ब कलेक्टर साहब की मीटिंग में है’। हमारे सा’ब तो हर समय ड्यूटी पर रहते हैं। अगर यहां नहीं है और मीटिंग भी नहीं है तो फिर इंस्पेक्शन में गए होंगे।
ऑफिस रोज आते है लेकिन यहां बैठने का मौका कम ही मिलता है उन्हें। अगर आपको मिलना है तो कुछ देर इंतजार कीजिए। आएंगे जरूर। इंतजार में भले ही पूरा दिन निकल जाए लेकिन सेक्रेट्री सा’ब नजर नहीं आते। विदित रहे कि जुलाई के बाद सचिव सा’ब ऑफिस में कम ही मिलते है। पहले चुनाव का बहाना था। उसके बाद सफाई अभियान, ऊंट उत्सव आदि इवेंट में भी उनकी ड्यूटी लगा दी जाती है। ऐसे में उन्हें कार्यालय में बैठने का समय कम ही मिल पाता है।