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सिर पर धारण करने लायक होती है गुरु की आज्ञा
भास्कर न्यूज - बीकानेर
आचार्य महाश्रमण ने कहा कि शिष्य के लिए यह वांछनीय है कि वह गुरु प्रसाद का केवल आकांक्षी ही न रहे बल्कि गुरु प्रसाद जिस तरीके से मिल सके वो कार्य भी करे। गुरु की आज्ञा मात्र हाथ में लेने की नहीं सिर पर धारण करने लायक होती है।
आचार्य महाश्रमण गुरुवार को ‘शिरोधार्य है गुरु आज्ञा’ विषय पर तेरापंथ भवन में प्रवचन दे रहे थे। आचार्य महाश्रमण ने कहा कि यदि गुरु की आज्ञा अंतर्मन से पूरी की जाए तो उसका एक अलग ही महत्त्व होता है। शिष्य गुरु के वचन का सफल बनाए, मन से स्वीकार करे और कार्य संपन्न करने के बाद संपन्नता की सूचना भी दे तो इस आज्ञा का पूर्ण पालन समझा जाता है।
उन्होंने कहा कि गुरु अगर आपको कोई निर्देश दे तो समझ लें कि आपका सौभाग्य है कि इस कार्य के लिए गुरु ने आपको सही समझा है। गुरु की आज्ञा का सम्मान नहीं किया तो गुरु के हृदय में स्थान नहीं बना सकोगे। जो गुरु को और गुरु की आज्ञा को महत्त्व नहीं देते वे धर्मसंघ को आगे बढ़ाने लायक नहीं होते। उन्होंने कहा कि गुरु की आज्ञा लक्ष्मण रेखा की तरह होती है। बिना गुरु की आज्ञा के एक पत्ता भी नहीं हिले इसका ध्यान रखना चाहिए। आचार्य तुलसी जन्म शताब्दी समारोह व वृहद मर्यादा महोत्सव के लिए बीकानेर आए आचार्य महाश्रमण का गुरुवार को तेरापंथ भवन में आध्यात्मिक अभिनंदन हुआ। इस मौके पर मुनि सुमेरमलजी ने कहा कि भाग्यशाली व्यक्ति को संतों का योग मिलता है। वे परम भाग्यशाली होते हैं जिन्हें संतों को मार्गदर्शन मिलता है। मंत्री मुनि ने कहा कि महाश्रमणजी वृहद मर्यादा महोत्सव की समायोजना को लेकर बीकानेर आए हैं। ऐसा अवसर मिलना संयोग की बात होती है।
उन्होंने कहा कि लाभ उठाना व्यक्ति की विवेकपूर्ण जागरूकता है। जागरूकता के अभाव वाला व्यक्ति अवसर का फायदा नहीं उठा सकता है। उन्होंने गंगाशहर वासियों को इस अवसर का लाभ उठाने की बात कही। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को समय तो मिलता है लेकिन वह छोटे-छोटे लाभ में उलझकर रह जाता है। इस उलझन में वह बड़े लाभ को गंवा देता है। छोटी जिंदगी में अगर व्यक्ति धर्म करें तो बड़ा लाभ कमा सकता है। जिसे गुरु सान्निध्य मिला है, धर्म की प्रेरणा मिली है, फिर भी वह धर्म नहीं करता है तो उसे अगले जन्म में पाश्चाताप करना पड़ता है। 41 दिन तक निराहार रहकर तपस्या करने वाले मुनि अजयप्रकाश ने का पारणा आचार्यप्रवर ने अपने हाथों से करवाया।
इस मौके पर मुनि अजयप्रकाश ने महाश्रमण का अभिनंदन करते हुए कहा कि गुरु कृपा से ही बड़ी तपस्या सफल हो सकती है। आचार्यप्रवर ने कहा कि ये हमारे त्यागी तपस्वी संत है। पिछले दिनों लाडनूं में मासखमण का तप किया था और अब छह महीने के भीतर ही यह दूसरी बड़ी तपस्या आज संपन्न करवा रहे हैं। अभिनंदन कार्यक्रम में मुनि अजित कुमार ने महाश्रमणजी का अभिनंदन किया तथा मुनि अजयप्रकाश की तपस्या के बारे में मुक्तक प्रस्तुत कर उनका बहुमान किया। व्यवस्था समिति के संयोजक हंसराज डागा ने कहा कि महाश्रमण के पधारने से जन-जन में उल्लास है।महापौर भवानीशंकर शर्माने कहा कि गंगाशहर के एक मुख्य मार्ग को अहिंसा मार्ग तथा महाप्रज्ञजी के नाम से चौक स्थापित करना और वो भी मरे निमित होना यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है।महापौर ने महाश्रमण को अपना ध्यान बीकानेर की ओर रखने की बात कही।साध्वी तन्मया ने कहा कि वे सौभाग्यशाली हैं जिन्हें संसार पक्षीय माता-पिता ने प्रेरणा दी है तथा स्वयं ने भी दीक्षा ली। साध्वी ने अपना उद्बोधन राजस्थानी में दिया।कार्यक्रम का संचालन जैन लूणकरण छाजेड़ ने किया।
आचार्य महाश्रमण को भिक्षु पंचांग भेंट
गंगाशहर में प्रवास व्यवस्था समिति की ओर से गुरुवार को आचार्य महाश्रमण को भिक्षु कैलेंडर भेंट किया गया। समिति के परामर्शक टोडरमल लालानी, संयोजक हंसराज डागा, मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र डाकलिया ने महाश्रमण के गंगाशहर पदार्पण पर आकर्षक एवं विस्तृत जानकारी युक्त भिक्षु पंचांग कैलेंडर की प्रथम प्रति भेंट की। इस मौके पर अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद की ओर से प्रकाशित तेरापंथ टाइम्स की नई प्रति महाश्रमण को भेंट की। कन्या मंडल की सदस्य दिव्या नाहटा ने अपने हाथ से बनाई हुई आचार्य तुलसी की सुंदर तस्वीर आचार्य प्रवर को भेंट की।
महाश्रमण के कार्यक्रम के लिए ऑटो किराए में छूट
बीकानेर। गंगाशहर तेरापंथ भवन में आचार्य महाश्रमण के प्रवचन सुनने के लिए बाहर से आने वालों लोगों को गंगाशहर तक पहुंचाने के लिए ऑटोचालकों ने अपनी किराए में ५० प्रतिशत तक की कमी की है। यह जानकारी देते हुए भारतीय राष्ट्रीय ट्रांसपोर्ट कर्मचारी फैडरेशन इंटक के उपाध्यक्ष हेमंत किराड़ू ने बताया कि गंगाशहर-भीनासर आने-जाने वाले श्रावकों से भी कम रुपए वसूले जाएंगे। संपतसिंह राजपुरोहित ने ऑटोचालकों से २२ दिन तक यह व्यवस्था बना रखने का आग्रह किया।
मुमुक्षु रजनी की हुई खोळ भराई
तेरापंथ धर्मसंघ की दीक्षार्थी मुमुक्षु रजनी की खोळ भराई की रस्म गुरुवार को गंगाशहर के माता राणी भटियाणी मंदिर में हुई। खोळ भराई की रस्म के उनके मामा दिलीपसिंह ने पूरी की। मुमुक्षु रजनी की दीक्षा दो फरवरी को प्रस्तावित है।