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पांच साल मैनेज नहीं होने देंगे अकादमी पुरस्कार
भास्कर न्यूज - बीकानेर
साहित्य अकादमी के हिंदी परामर्श मंडल संयोजक सूर्यप्रसाद दीक्षित ने यह कहकर चौंका दिया है कि पूर्व में अकादमी के पुरस्कार भी मैनेज होते रहे हैं। खासतौर पर प्रगतिशील विचारधारा के नाम पर काम करने वाले लोगों ने ऐसे साहित्यकारों को पुरस्कार दे दिए जो पात्र नहीं थे। ऐसी आपाधापी करने वालों में उन्होंने एक वरिष्ठ साहित्यकार का नाम भी लिया। वादा किया, विश्वास रखिये अब पांच साल पूरी पारदर्शिता से पुरस्कार दिए जाएंगे। हम इन्हें मैनेज नहीं होने देंगे। इस बार मृदुला गर्ग को दिया गया पुरस्कार इसका उदाहरण है।
विष्णु प्रभाकर जन्मशतवार्षिकी संगोष्ठी में शिरकत करने बीकानेर आए दीक्षित ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, पुरस्कार के लिए बाकायदा अकादमी की चयन प्रक्रिया बनी हुई है जिसमें चेयरमैन से लेकर विशेषज्ञ तक भी अपने मन से कुछ नहीं कर सकेंगे। हिंदी की हालत पर दीक्षित बोले, हिंदी के नाम पर देश टूट जाने का भय पैदा करने से ही इसके पिछडऩे की शुरुआत हो गई। बाद में डा.लोहिया ने जिस तरह तारकोल पुतवाया वह बुरा हुआ। साहित्य अकादमी भाषाओं के माध्यम से राष्ट्रीय एकता स्थापित करना चाहती है।हम हिंदी के माध्यम से भारतीय साहित्य प्रकाशित करना चाहते हैं।
अकादमी के उद्देश्य ठीक, लेकिन अमल पूरी तरह नहीं हो पाने के सवाल पर बोले, इसमें कई तरह के अवरोध आ जाते हैं। दफ्तर की रुकावटें, बजट की सीमाएं आदि। इसके बावजूद लगातार जोर आजमाइश करते रहने से कुछ न कुछ सफलता जरूरत मिलेगी। हिंदी साहित्य में बढ़ रही ‘हिंग्लिश’ के मुद्दे पर चिंता जताई। बोले, इसका समाधान एक ही है कि समझौता न किया जाए। जहां एकदम जरूरी हो वहीं दूसरी भाषा या अंग्रेजी के शब्दों का उपयोग किया जाए।
साहित्य अकादमी हिंदी परामर्श मंडल के संयोजक सूर्यप्रसाद दीक्षित से बात