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आचार्य महाश्रमण ने कहा कि जिस तरह चन्द्रमा की रात्रि में प्रधानता होती है उसी प्रकार धर्मसंघ साधु वर्ग में आचार्यों का बड़ा महत्व होता है।
महाश्रमण मंगलवार को तेरापंथ भवन में ‘सर्वोपरि कौन संघ या संघपति’ विषय पर प्रवचन दे रहे थे। उन्होंने कहा कि संघ बड़ा होता है व्यक्ति नहीं। व्यक्ति एक इकाई है। समाज बड़ा होता है, व्यक्ति नहीं। समाज हित के लिए व्यक्तिगत हित गौण कर दिया जाता है। गणि से भी बड़ा गण होता है। गण में श्रावक-श्राविका, साधु-साध्वी होते हैं। वे आचार्य को निवेदन तथा आवेदन कर सकते हैं लेकिन चुनौती नहीं दे सकते। संयम के बारे में बताते हुए आचार्य ने कहा कि संयम से अनेक समस्याओं को पैदा होने से बचाया जा सकता है। व्यापारी को व्यापार द्वारा जनता की सेवा तथा अपने परिवार का भरण-पोषण करना चाहिए लेकिन इसमें नैतिकता जरूर होनी चाहिए। चिकित्सक, वकील सबको अपने कार्यों में सेवा और नैतिकता को प्राथमिकता देनी चाहिए। जनता में नैतिक मूल्यों का विकास हो इसके लिए संयमी होना आवश्यक है। इस मौके पर मंगलवार को तेरापंथ महिला मंडल की ओर से महिला सम्मेलन का आयोजन किया गया।
‘संयम से व्यक्तित्व विकास’ विषय पर व्याख्यान देते हुए साध्वी प्रमुखा कनकप्रभा ने कहा कि जिस व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र में संयम होता है उसमें विकास होता है। नारी एक पवित्र ज्योति है। त्याग उसका स्वभाव और सहनशीलता उसका व्रत। सहिष्णुता महिला का स्वाभाविक गुण है, महिलाएं सहनशील बन कर ही परिवार को संस्कारित बनाती हैं। असंयम से राष्ट्र का पतन होता है। जैन संस्कृति में संयम कण-कण में है। इसलिए जीवन के हर व्यवहार में संयम हो। सम्मेलन में मंडल की राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज बरडिय़ा ने कहा कि आचार्य तुलसी ने लगभग छह दशक पूर्व महिलाओं में जागृति की अलख जगाई। हमने अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिला दी, हमारे बच्चों ने बड़ी-बड़ी डिग्रियां प्राप्त कर ली, लेकिन हम उन्हें अध्यात्म तथा आचरण की शिक्षा नहीं दे रहे। बरडिय़ा ने कहा कि महिला समाज की धूरी होती है। महिला सम्मेलन होते हैं, संकल्प भी लिए जाते हैं लेकिन एक माह से ज्यादा नहीं टिकते। हमें महिलाओं को जागृत करना होगा। महिलाएं भी अपने बच्चों में नैतिकता की अलख जगाएं।
सम्मेलन में साध्वीश्री विश्रुतविभा ने कहा कि स्त्री परिवार ही नहीं राष्ट्र निर्माता है। रिश्ते तभी पनपते हैं जब परिवार में सम्मान हो एक-दूसरे का, सामंजस्यता हो। उन्होंने अपने बच्चों को समय और संस्कारों की शिक्षा देने की बात कही। बीकानेर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. चन्द्र कला ने कहा कि जैन समुदाय में इतनी स्त्रियां संयम का व्रत लेती है तथा इतनी साध्वियां हैं। इन्हें देखकर यह निश्चित हो जाता है कि इस देश का भविष्य सुरक्षित है। विराट महिला सम्मेलन में जिला कलक्टर आरती डोगरा, विधायक सिद्धि कुमारी ने भी शिरकत की। कार्यक्रम की शुरुआत महिला मंडल ने गीतिका से की। तथा स्वागत शारदा डागा ने किया। कार्यक्रम का संचालन संतोष बोथरा व आगंतुकों का आभार मधु छाजेड़ ने
प्रकट किया।
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