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व्यक्तित्व विकास के लिए दिशा तय करें व्यक्ति
बीकानेर - स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य सोमवार को तेरापंथ युवक परिषद की ओर से युवा सम्मेलन का आयोजन तेरापंथ भवन में आचार्यश्री महाश्रमण के सान्निध्य में किया गया। सम्मेलन में लगभग 450 युवाओं ने भाग लिया।
‘व्यक्तित्व विकास से कैसे बनाएं पहचान’ विषय पर वक्ताओं ने विचार प्रकट किए। प्रथम सत्र में कार्यक्रम की शुरुआत राजेन्द्र बोथरा ने विजयगीत के साथ की। तेयुप गंगाशहर के अध्यक्ष मनोज सेठिया ने आगंतुकों का परिचय दिया। प्रथम सत्र के वक्ता कर्नल लौह मरोड़ ने अपने वक्तव्य में कहा कि व्यक्तित्व विकास के द्वारा अपनी पहचान बनाने के लिए आवश्यक है व्यक्ति अपनी दिशा तय करे तथा उस क्षेत्र में ज्ञान अर्जन के जितने अवसर मिले उनका उपयोग करें। मुनि सुमेरमल ने कहा कि ‘हर व्यक्ति अनवरत विकास चाहता है। व्यक्तित्व के विकास के द्वारा व्यक्ति अपनी पहचान बनाएं उसके लिए आवश्यक है कि उसका व्यक्तित्व, उसकी पहचान परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए कितना उपयोगी है। इसके लिए प्रशिक्षण के साथ-साथ सत्यनिष्ठा, संस्कार तथा चरित्र का विकास होना आवश्यक है।
दूसरे चरण में ‘विकास के विभिन्न आयाम’ विषय पर अपने वक्तव्य में डॉ.चक्रवर्ती ने कहा कि ‘शरीर पांच तत्वों से मिलकर बनता है उसमें जिस तत्व की प्रधानता होती है व्यक्ति का व्यवहार वैसा ही बन जाता है व्यक्ति अपनी सोच के साथ साथ दूसरों के विचारों को भी महत्व दे। मुनिश्री संबोध कुमार जी ने कहा कि व्यक्ति को अपनी पहचान बनाने के लिए स्वयं की क्षमता को पहचानना व विश्वास आवश्यक है। दूसरे सत्र का शुभारंभ मनोज छाजेड़ ने मंगलाचरण द्वारा किया। मुख्य वक्ता डॉ. चक्रवर्ती नारायण श्रीमाली का परिचय व स्वागत तेयुप के पूर्व अध्यक्ष जतन संचेती ने किया। जैन लूणकरण छाजेड़, जतनलाल दूगड़, इन्द्र चन्द सेठिया तथा राजेन्द्र नाहटा ने कार्यक्रम में आगंतुकों को साहित्य भेंट कर सम्मानित किया। आभार धर्मेंद्र डाकलिया प्रकट किया। संचालन मनीष बाफना ने किया। मर्यादा महोत्सव व्यवस्था समिति के संयोजक हंसराज डागा व सहसंयोजक महावीर रांका ने युवाओं के व्यक्तित्व विकास से संबंधित कार्यों व नशा मुक्ति संकल्प ग्रहण करने की सराहना की।