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दुर्घटना पीडि़तों पर भारी पड़ रही ट्रोमा सेंटर की कमी

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - बीकानेर
बीकानेर में ट्रोमा सेंटर की कमी उन मरीजों पर भारी पड़ रही है जो दुर्घटनाग्रस्त होकर हॉस्पिटल पहुंचते हैं। कइयों की सांसें उखड़ जाती है तो कुछ को इलाज मिलने में देरी होती है। इन स्थितियों के चलते आए दिन डाक्टर-मरीजों के बीच झगड़े भी होते हैं। ऐसे में मेडिकल कॉलेज और पीबीएम हॉस्पिटल प्रशासन ने सरकार को पत्र भेजकर जहां जल्द ट्रोमा सेंटर चालू करवाने का आग्रह किया है वहीं निर्माणाधीन सेंटर भवन के काम को पूरा करने की कवायद भी तेज कर दी है।
गुरुवार को कॉलेज प्राचार्यडा.के.सी.नायक की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में निर्माणाधीन सेंटर के कार्य प्रगति पर खासतौर पर चर्चा हुई। हॉस्पिटल सुपरिटेंडेंट डा.वी.बी.सिंह, सेंटर के प्रभारी डा.बी.एल. खजोटिया, यूआईटी के अधिकारी एवं दानदाता प्रतिनिधियों की मौजूदगी में हुई मीटिंग में इस बात पर चिंता जताई कि काम में देरी की वजह से लागत बढ़ गई। ऐसे में 10 करोड़ रुपए के प्रस्तावित सेंटर पर दो करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च करने के बाद भी अभी मॉड्यूलर ओटी, लिफ्ट, सीवरेज और लाइट का काम बाकी रह गया। हालांकि 80 फीसदी से ज्यादा काम हो चुका है। ऐसे में बाकी पैसे के इंतजाम के लिए एक बार फिर जिला प्रशासन, यूआईटी एवं दानदाता से आग्रह किया जा रहा है। इन अधिकारियों ने आपसी सहयोग से निर्माण जल्द पूरा होने की संभावना जताई। बात इसे चालू करने पर आकर अटक गई।
सुपरिटेंडेंट डा.वी.बी.सिंह ने कहा, जब तक मैन पॉवर और अतिरिक्त उपकरण उपलब्ध नहीं होते सेंटर को चालू करने से मरीजों को कोई लाभ नहीं होगा। ऐसे में सरकार को भेजे गए मैन पॉवर व उपकरणों के प्रस्ताव जल्द दिलवाने के लिए दुबारा पत्र भेजने का निर्णय हुआ। ट्रोमा सेंटर पर केन्द्रित इस मीटिंग में अतिरिक्त प्राचार्यडा.आर.ए. बंब, सर्जरी विभागाध्यक्ष डा.एस.पी. चौहान, यूआईटी अधिकारी भंवरु खां आदि भी मौजूद थे।



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