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बीकानेर हाउस में बीकानेर का कोई हिस्सा नहीं

8 वर्ष पहले
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बीकानेर. आजादी के 67 साल बाद दिल्ली के जिस बीकानेर हाउस को राजस्थान सरकार को सुपुर्द करने की सहमति बनी है। वह बीकानेर के तत्कालीन महाराजा गंगा सिंह जी का ड्रीम प्रोजेक्ट था।

आज जिस ऐतिहासिक भवन व जगह की कीमत लगभग 5000 करोड़ रुपए आंकी जा रही है। उसके निर्माण पर वर्ष 1927-28 में 4,89,486 रुपए खर्च हुए थे। आठ एकड़ के इस बीकानेर हाउस की जमीन उस समय में 14,400 रुपए में खरीदी गई थी। रोचक बात यह है कि जिस बीकानेर हाउस को महाराजा गंगा सिंह ने बनवाया था, उस में आज तत्कालीन राज परिवार या बीकानेर की कोई दखलंदाजी नहीं है।

शिल्प और सौंदर्य में अनूठे इस बीकानेर हाउस के निर्माण के लिए बीकानेर के तत्कालीन महाराजा गंगा सिंह की ओर से पब्लिक वर्क मिनिस्टर और कॉन्ट्रेक्टर सेठ लक्ष्मी दास के बीच वर्ष 1927 में एमओयू हुआ। तत्कालीन आर्किटेक्ट बुलुम फिल्ड ने जून 1928 को पब्लिक वर्क मिनिस्टर को बीकानेर हाउस के पूर्ण होने की रिपोर्ट दी। बीकानेर हाउस में उस समय ग्राउंड फ्लोर पर जनाना पोर्च, जनानी ड्योढ़ी, आधुनिक हॉल, 125 सीट का डाइनिंग हॉल, ड्रांइग रूम सहित 20 बाई 20 फीट के बैड रूम सहित तीन सेपरेट बैडरूम का निर्माण करवाया गया।

आजादी के बाद बीकानेर हाउस को राज्य सरकार के सुपुर्द किया गया मगर 15 मई 1954 से बीकानेर हाउस के अधिकांश भाग पर केंद्र सरकार ने अपना कब्जा जमा लिया। वर्तमान में केंद्र सरकार के 24 दफ्तर इस हाउस में संचालित हो रहे हैं।

मामला कोर्ट में पहुंचने के बाद आखिरकार केंद्र सरकार ने इस ऐतिहासिक हाउस को राज्य सरकार को वापस लौटाने की हामी भरी है। राज्य और केंद्र सरकार के बीच समझौते के मुताबिक 31 मई को केंद्र सरकार बीकानेर हाउस को खाली कर देगा। वहीं राज्य सरकार दिल्ली स्थित लोदी एस्टेट को केंद्र सरकार को सौंपेगा।