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टीसी के सामने ही धड़ल्ले से पटरी पार करते हैं लोग
कार्यालय संवाददाता. दौसा
रेलवे स्टेशन पर 2 टिकट संग्राहक ((टीसी)) हैं। टीसी की आंखों के सामने से रोजाना सैकड़ों लोग पटरी पार कर एक से दूसरे प्लेटफॉर्म पर आते-जाते हैं। पटरी पार करना जुर्म है। पकड़े जाने पर 200 रुपए तक पैनल्टी है। इसके बावजूद टीसी पटरी पार करने वालों को पकड़ते नहीं हैं। टीसी जिम्मेदारी से काम करें तो रेलवे को हर माह मोटी आय हो सकती है, जबकि
दोनों टीसी पर रेल प्रशासन 40 हजार ((सैलेरी)) खर्च करती है।
प्लेटफॉर्म नंबर दो की साइड रहने वाले लोगों ने रेलवे स्टेशन को आम रास्ता बना रखा है। लोग पटरी पार कर इधर से उधर जाते हैं। डबल लाइन होने के बाद हादसे की आशंका बढ़ गई। नजर हटी दुर्घटना घटी की तर्ज पर पटरी पार करने वाले कभी भी ट्रेन की चपेट में आ सकते हैं। पटरी पार करने वालों को रोकने और उनके खिलाफ कार्रवाई की जिम्मेदारी टीसी की होती है। ऐसा नहीं है कि टीसी के सामने लोग पटरी पार नहीं करते हैं, लेकिन टीसी उन लोगों की रसीद ((पैनल्टी)) नहीं बनाता है। इसके चलते देखा देख पटरी पार करने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। कभी हादसा हुआ तो टीसी ही नहीं दूसरे अधिकारियों को भी जवाब देना भारी पड़ सकता है।
याद आते हैं जितेंद्र शर्मा
एक टीसी चाहे तो क्या नहीं कर सकता है। यह करके दिखाया था जितेंद्र शर्मा ने, जो करीब 4 चार पहले सिर्फ 3 दिन के लिए ट्रेनिंग पीरियड में दौसा आए थे।
टीसी जितेंद्र शर्मा ने स्टेशन से बिना टिकट और पटरी पार करने वालों के खिलाफ अभियान चलाया था। पकड़े जाने पर किसी को छोड़ा नहीं। पैनल्टी वसूल कर ही छोड़ा। इसके चलते लोगों ने स्टेशन की ओर आना छोड़ दिया तथा रास्ता बदल लिया। ऐसे टीसी शर्मा को अब भी लोग यदा कदा
याद करते हैं। जितेंद्र शर्मा अब अलवर में हैड टीसी हैं। इसी श्रेणी में टीसी मूला राम जाट, शक्ति सिंह भी आते हैं।