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\'स्वामीनाथन कमीशन की रिपोर्ट लागू होती तो किसान आत्महत्या नहीं करते\'

7 वर्ष पहले
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दौसा। किसानों के लिए स्वामीनाथन कमीशन की रिपोर्ट बहुत महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार ने अक्टूबर-07 से रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल रखा है। कमीशन की रिपोर्ट लागू होती तो किसानों को गेहूं का 21 सौ रुपए, गन्ने का 375 रुपए प्रति क्विंटल भाव मिलते। 50 प्रतिशत लाभांश की सिफारिश भी की थी। इस संबंध में गुरुवार को भाजपा किसान मोर्चा ने राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को ज्ञापन दिया।

साथ ही बताया कि हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में पांच सदस्यीय कमेटी ने प्राकृतिक प्रकोप से फसल को नुकसान होने की स्थिति में 10 हजार रुपए प्रति एकड़ की दर से मुआवजा देने की सिफारिश की थी। वह रिपोर्ट भी दिसंबर-10 से केंद्र सरकार के पास है। केंद्र सरकार की उदासीनता के चलते किसान आत्म हत्या करने को मजबूर हैं।

कांग्रेस सरकार के 9 साल 8 माह में देशभर में 1 लाख 45 हजार किसानों ने आत्म हत्या की। इसके लिए सीधे-सीधे केंद्र की कांग्रेस सरकार जिम्मेदार है। साथ ही ज्ञापन में लिखा कि यूपीए सरकार में हुई ऋण माफी का फायदा किसानों को नहीं, बल्कि बैंकों को मिला।

किसानों को बैंक अब कुर्की के नोटिस भेज रहे हैं। स्वामीनाथन कमीशन की 50 फीसदी लाभांश के साथ लाभकारी मूल्य की सिफारिश जल्द लागू की जाए। ज्ञापन देने वालों में महेंद्र सिंह खंडेला, मुकेश बासड़ा, मनोज कुमार बैरवा, विजय सिंह, कजोड़ मल बैरवा, बनवारी छोकरवाड़ा, दयाराम, सूरज जायसवाल, रामसिंह कंवर, मांगी लाल सैनी, प्रहलाद महेश्वरा आदि थे।

राजस्व मामलों की मॉनिटरिंग होगी
एडीएम भगवान सहाय शर्मा की अध्यक्षता में राजस्व अधिकारियों की बैठक गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित की गई। शर्मा ने राजस्व संबंधित प्रकरणों का समय पर मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने ई-ग्रास सिस्टम के तहत ई-चालान सृजित कर राशि जमा कराने, राजस्व लेखा संबंधित मदों व उप मदों के बजट हैंड की प्रगतिवार समीक्षा की। बैठक में निरीक्षक राजस्व लेखा विश्राम मीणा, जिला राजस्व लेखाकार राम प्रताप, सहायक सूचना अधिकारी वेद प्रकाश गुप्ता सहित अन्य राजस्व कर्मचारी उपस्थित थे।