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हाईबीम लाइट्स कर सकती हैं दूसरों की जिंदगी में अंधेरा

7 वर्ष पहले
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श्रीगंगानगर. क्षेत्र में तेज रफ्तार से गाड़ी चलाने के शौकीन लोग नियमों को तोड़कर हाईवे पर ही नहीं शहर की गलियों में भी हाई पावर बीम हेडलाइट्स लगाकर गाडिय़ां दौड़ा रहे हैं। उन्हें इस बात की फिक्र नहीं कि जिस रोशनी को वे अपनी सहूलियत के लिए उपयोग कर रहे हैं, वह दूसरों की दुनिया अंधेरे में डुबो सकती है। इन हेडलाइट्स की तेज रोशनी के कारण सामने से आ रही गाड़ी के चालक को कुछ नजर नहीं आता, जिससे दुर्घटना हो जाती है। लेकिन हाईबीम लाइट लगाने वालों को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है।

50 की जगह 120 वॉट का बल्ब

सूरतगढ़ रोड स्थित एक एसेसरीज शोरूम मालिक ने बताया कि कंपनियों से कार व अन्य एसयूवीज में 12 एपियर का 40-60 वॉट का बल्ब लगा आता है। बल्ब के ग्लास में दो फिलामेंट होते हैं, जिनका इस्तेमाल अपर व लोअर बीम लाइट के लिए किया जाता है, लेकिन तेज रफ्तार से गाड़ी चलाने वाले लोग अक्सर इस बल्ब की जगह अपने वाहन में 90-120 वॉट का बल्ब लगवा लेते हैं ताकि तेज रफ्तार से चलाने पर वाहन रोड पर ज्यादा दूरी तक नजर आए। इस बल्ब की कीमत भी दूसरे बल्ब की तुलना में कम होती है। मात्र 200 से 300 रुपए में ऐसे हेडलाइट बल्ब मिल जाते हैं। लोग सस्ते बल्ब के लालच में ये लाइट लगवा लेते हैं जबकि कुछ लोग ज्यादा रोशनी व बल्ब को फ्यूज होने से बचाने के लिए साथ में रिले भी लगा लेते हैं। यही नहीं हेडलाइट की जगह 150 वॉट तक का कटआउट भी लगवाते हंै।

लगवाते हैं एचआईडी किट

कई लोग ऐसे होते हैं जो इससे भी अधिक रोशनी के लिए गाड़ी में एचआईडी किट लगवाते हैं। इसमें अलग से वायरिंग कर दो बल्ब और ब्लास्टर लगाए जाते हैं, जिस पर तकरीबन 5 हजार रुपए का खर्चा आता है। इन हाईबीम हेडलाइट्स की रोशनी के आगे किसी की आंखें खुलीरह पाना मुश्किल होता है। फिर भी ऐसे लोग ऐसी लाइट्स का इस्तेमाल हाईवे पर ही नहीं, शहर की गलियों में भी गाड़ी चलाते समय करते हैं।





नगर संवाददाता - श्रीगंगानगर

क्षेत्र में तेज रफ्तार से गाड़ी चलाने के शौकीन लोग नियमों को तोड़कर हाईवे पर ही नहीं शहर की गलियों में भी हाई पावर बीम हेडलाइट्स लगाकर गाडिय़ां दौड़ा रहे हैं। उन्हें इस बात की फिक्र नहीं कि जिस रोशनी को वे अपनी सहूलियत के लिए उपयोग कर रहे हैं, वह दूसरों की दुनिया अंधेरे में डुबो सकती है। इन हेडलाइट्स की तेज रोशनी के कारण सामने से आ रही गाड़ी के चालक को कुछ नजर नहीं आता, जिससे दुर्घटना हो जाती है। लेकिन हाईबीम लाइट लगाने वालों को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है।

50 की जगह 120 वॉट का बल्ब : सूरतगढ़ रोड स्थित एक एसेसरीज शोरूम मालिक ने बताया कि कंपनियों से कार व अन्य एसयूवीज में 12 एपियर का 40-60 वॉट का बल्ब लगा आता है। बल्ब के ग्लास में दो फिलामेंट होते हैं, जिनका इस्तेमाल अपर व लोअर बीम लाइट के लिए किया जाता है, लेकिन तेज रफ्तार से गाड़ी चलाने वाले लोग अक्सर इस बल्ब की जगह अपने वाहन में 90-120 वॉट का बल्ब लगवा लेते हैं ताकि तेज रफ्तार से चलाने पर वाहन रोड पर ज्यादा दूरी तक नजर आए। इस बल्ब की कीमत भी दूसरे बल्ब की तुलना में कम होती है। मात्र 200 से 300 रुपए में ऐसे हेडलाइट बल्ब मिल जाते हैं। लोग सस्ते बल्ब के लालच में ये लाइट लगवा लेते हैं जबकि कुछ लोग ज्यादा रोशनी व बल्ब को फ्यूज होने से बचाने के लिए साथ में रिले भी लगा लेते हैं। यही नहीं हेडलाइट की जगह 150 वॉट तक का कटआउट भी लगवाते हंै।

लगवाते हैं एचआईडी किट : कई लोग ऐसे होते हैं जो इससे भी अधिक रोशनी के लिए गाड़ी में एचआईडी किट लगवाते हैं। इसमें अलग से वायरिंग कर दो बल्ब और ब्लास्टर लगाए जाते हैं, जिस पर तकरीबन 5 हजार रुपए का खर्चा आता है। इन हाईबीम हेडलाइट्स की रोशनी के आगे किसी की आंखें खुलीरह पाना मुश्किल होता है। फिर भी ऐसे लोग ऐसी लाइट्स का इस्तेमाल हाईवे पर ही नहीं, शहर की गलियों में भी गाड़ी चलाते समय करते हैं।

रात्रि में ड्यूटी नहीं, कैसे हो कार्रवाई

॥मोटर वाहन अधिनियम के अंतर्गत हाईबीम लाइट जलाना दंडनीय अपराध है। कई बार ये लाइट एक्सीडेंट का कारण बनती हैं। ट्रैफिक पुलिस की रात्रि में ड्यूटी न होने के कारण हाईबीम लाइट लगाने वालों पर कार्रवाई नहीं हो पाती है। - धीरेंद्र शेखावत, ट्रैफिक इंचार्ज