पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • अब हमें चाहिए लंबी दूरी की और ट्रेनें

अब हमें चाहिए लंबी दूरी की और ट्रेनें

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
श्रीगंगानगर. श्रीगंगानगर रेलवे स्टेशन को मॉडर्न स्टेशन का दर्जा मिले 11 साल हो चुके हंै। जिला मुख्यालय से बीकानेर व अमृतसर के लिए कोई इंटरसिटी ट्रेन नहीं है। ऐसे में मजबूरन यात्रियों को अधिक किराया खर्च कर प्राइवेट व रोडवेज बसों में सफर करना पड़ रहा है। श्रीगंगानगर-सूरतगढ़ के बाद अब हनुमानगढ़ ट्रैक भी ब्रॉडगेज हो चुका है। अब जिलेभर के लोगों को यहां से जोधपुर, बाड़मेर, सूरतगढ़, अहमदबाद, मुंबई, लुधियाना के अलावा पंजाब के अन्य स्टेशनों पर जाने के लिए लंबी दूरी की और ट्रेनें मिलने की दरकार है। हनुमानगढ़ के लिए भी शीघ्र पैसेंजर ट्रेन का संचालन शुरू होने की उम्मीद है।

यादगार सफर के लिए जा रहा हूं हनुमानगढ़

नई ट्रेन में सफर कर यादगार पलों का हिस्सा बनने के लिए हनुमानगढ़ जा रहा हूं। लंबे समय से सोच रहा था कि आखिर ट्रेन कब शुरू होगी। यह कहना है श्रीगंगानगर के श्याम चौहान का, जो इस ऐतिहासिक सफर का हिस्सा बनने के लिए शाम को ट्रेन से हनुमानगढ़ रवाना हुए। उन्होंने बताया कि वहां रिश्तेदारों से मिलकर कल इसी ट्रेन से दोबारा श्रीगंगानगर लौट आऊंगा। बस में तो दो साल से जा ही रहे हंै। अब नई ट्रेन का सफर भी करके देख लें।

सादुलशहर तक का किराया एक जैसा

हनुमानगढ़ के लिए शुरू हुई इस ट्रेन का किराया सादुलशहर तक बस के बराबर है। ट्रेन व बस दोनों में मंडी तक जाने के लिए 30 रुपए लगते हंै। यह कहना है राजेंद्र का। वह सादुलशहर से हर रोज नर्सिंग कोर्स करने के लिए अपडाउन करते हैं। उन्होंने कहा कि ट्रेन चलते से बसों की मनमानी जरूर कम होगी। हां पूरा फायदा मंथली पास बनने और पैसेंजर ट्रेन के शुरू होने से ही मिलेगा, क्योंकि सादुलशहर के बाद इस ट्रेन का ठहराव सीधे हनुमानगढ़ जंक्शन रेलवे स्टेशन पर है।

... भास्कर नॉलेज:

श्रीगंगानगर से हनुमानगढ़ ट्रैक: 67 किमी, रफ्तार: 50 किलोमीटर प्रति घंटा, स्टॉपेज: सादुलशहर

पहले: 2.00 अब: 1.45 घंटे

ट्रेन में कोच व सिटिंग कैपेसिटी

हनुमानगढ़-कोटा एक्सप्रेस ट्रेन में सेकंड एसी का एक, थर्ड एसी के दो, स्लीपर के आठ, जनरल के छह, दो एसएलआर कोच हैं। इन कोच में क्रमश: 46, 128, 576 व 625 यानी कुल 1375 यात्री एक साथ सफर कर सकते हैं।

मॉडर्न स्टेशन पर होनी चाहिए ये सुविधाएं

वाटरबूथ ((पेयजल की व्यवस्था)), टॉयलेट-वॉशरूम, विकलांगों के लिए एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर जाने के लिए अलग से रैंप, भोजनालय, प्रत्येक प्लेटफार्म पर कैंटीन, वाहनों के लिए पार्किंग, फुट ओवरब्रिज, लेडीज व जेंट्स के लिए अलग-अलग वेटिंग रूम, कोच डिस्पले बोर्ड, नेशनल ट्रेन इन्क्वायरी सिस्टम ((टच स्क्रीन मशीन)), बैठने के लिए बेंच, प्लेटफार्म शेड, एटीएम मशीन, बुक स्टॉल, प्लेटफार्म टिकट मशीन।

स्टीम इंजन से डीजल इंजन तक का सफर

89 साल पहले इस ट्रैक पर 71 साल तक स्टीम इंजन चला। उस समय सारा काम मैन्यूअल होता था। सात-आठ क्विंटल कोयला इंजन में डाला जाता था। तीन लोग इंजन में बारी-बारी से कोयला डालने का काम करते थे। मई 1994 में डीजल इंजन आने के बाद काम काफी आसान हो गया। सारा काम मशीनी होने के चलते इंजन में तीन के बजाय दो कर्मचारी चलने लगे।

हनुमानगढ़ ट्रैक पर कब क्या हुआ

-28 फरवरी 2012 को श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ ट्रैक पर रेलगाडिय़ों का आवागमन बंद हुआ। रात 8.05 बजे आखिरी बार यहां से मीटरगेज लाइन पर हनुमानगढ़ पैसेंजर ट्रेन रवाना हुई। फिर तत्कालीन डीआरएम एसएस गुप्ता ने हनुमानगढ़ के जंक्शन रेलवे स्टेशन पर ब्रॉडगेज के कार्य का शिलान्यास किया।

-31 मई 2012 को ट्रैक पर ब्रॉडगेज पटरियां बिछाने का काम पूरा कर लिया गया, क्योंकि ट्रैक महज 67 किमी लंबा था। काम की तेजी को देख लगा कि इसी वर्ष ब्रॉडगेज के नए ट्रैक पर हनुमानगढ़ के लिए ट्रेन शुरू हो जाएगी। यात्रियों को श्रीगंगानगर-सूरतगढ़ ट्रैक के शुरू होने की तरह ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

- 18 जुलाई 12 को चीफ इंजीनियर चाहतेराम टीम के साथ जयपुर से यहां आए। उन्होंने हनुमानगढ़ ट्रैक का मोटर ट्रॉली से श्रीगंगानगर तक जायजा लिया। भवनों के साथ ट्रैक पर हुए कार्यों में रही कमियों को सीआरएस के दौरे से पहले दुरुस्त करने के लिए कहा।

- 13 दिसंबर 12 को इस ट्रैक पर मशीनी पैकिंग का फस्र्ट फेज पूरा हुआ। बाद में दो बार पैकिंग और हुई। क्रॉसिंग के लिए कई स्टेशनों पर कांटे डाले गए। यह काम भी रेलवे ने काफी तेजी से पूरा किया।

17 जनवरी 13 को ट्रैक पर पहली बार ईपीटी ट्रेन चलाई गई। 30 से अधिक बोगियों को इस ट्रैक पर चलाकर पटरियों को बैलेंस किया गया। साथ ही जहां पर गिट्टी कम ज्यादा थी, उसे दुरुस्त करवाया।

-30 जनवरी 13 को ट्रैक पर बिल्डिंग वर्क का काम कंपलीट कर लिया गया। ट्रैक पर आने वाले सभी स्टेशनों पर बने नए भवनों को रंगरोगन कर चकाचक कर दिया ताकि ट्रैक जल्द से जल्द शुरू हो सके।

-31 मार्च 13 को पटरियों पर वैल्डिंग वर्क का काम कंपलीट हुआ। पहले ट्रैक पर मैन्यूअल पैकिंग की गई। बाद में मशीनी पैकिंग का चरण शुरू हुआ, जिसे रेलवे ने एक महीने में पूरा कर लिया।

-07 अप्रैल 13 को इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल का काम पूरा हुआ, जोकि पांच जनवरी को शुरू हुआ था। पहले ट्रैक पर इलेक्ट्रोनिक सिग्नल लगाने का विचार नहीं था। बाद में यह निर्णय हुआ। टेंडर लेट होने से इस काम को ठेकेदार भी तय समय पर पूरा नहीं कर पाया।

-15 अप्रैल 13 को ट्रैक का स्पीड ट्रायल हुआ। 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से इंजन को दौड़ाया गया। 67 किमी की दूरी ट्रेन ने महज 50 मिनट में पूरी कर ली। रेलवे अधिकारियों ने ट्रैक को ओके बताया।

- 10-11 दिसंबर को ट्रैक पर सीआरएस का दौरा हुआ। पहले दिन सीआरएस, सीईओ व डीआरएम ने मोटर ट्रॉली से दो चरणों में ट्रैक का निरीक्षण किया। अगले दिन 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ी ट्रेन 37 मिनट में हनुमानगढ़ पहुंची।

- 17 दिसंबर को सीआरएस पीएस बघेल ने मुंबई से ट्रैक के ओके होने की रिपोर्ट जारी की। कुछ बिंदुओं के लिए बीकानेर मंडल के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

- 27 दिसंबर को बीकानेर मंडल की डीआरएम को हनुमानगढ़ ट्रैक के ओके होने की रिपोर्ट मिली। उन्होंने ट्रेन चलाने के लिए रेलवे बोर्ड से अनुमति मांगी।

- 24 जनवरी 14 को जयपुर में रेलवे के चीफ पैसेंजर ट्रैफिक आरके मीणा ने सांसद भरतराम को 29 जनवरी से हनुमानगढ़ ट्रैक पर हनुमानगढ़-कोटा एक्सप्रेस ट्रेन के संचालन संबंधी पत्र दिया।





हनुमानगढ़ ट्रैक पर कब क्या हुआ

स्टीम इंजन से डीजल इंजन तक का सफर

89 साल पहले इस ट्रैक पर 71 साल तक स्टीम इंजन चला। उस समय सारा काम मैन्यूअल होता था। सात-आठ क्विंटल कोयला इंजन में डाला जाता था। तीन लोग इंजन में बारी-बारी से कोयला डालने का काम करते थे। मई 1994 में डीजल इंजन आने के बाद काम काफी आसान हो गया। सारा काम मशीनी होने के चलते इंजन में तीन के बजाय दो कर्मचारी चलने लगे।



मॉडर्न स्टेशन पर होनी चाहिए ये सुविधाएं

वाटरबूथ ((पेयजल की व्यवस्था)), टॉयलेट-वॉशरूम, विकलांगों के लिए एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर जाने के लिए अलग से रैंप, भोजनालय, प्रत्येक प्लेटफार्म पर कैंटीन, वाहनों के लिए पार्किंग, फुट ओवरब्रिज, लेडीज व जेंट्स के लिए अलग-अलग वेटिंग रूम, कोच डिस्पले बोर्ड, नेशनल ट्रेन इन्क्वायरी सिस्टम ((टच स्क्रीन मशीन)), बैठने के लिए बेंच, प्लेटफार्म शेड, एटीएम मशीन, बुक स्टॉल, प्लेटफार्म टिकट मशीन।



सादुलशहर तक का किराया एक जैसा

यादगार सफर के लिए जा रहा हूं हनुमानगढ़



भास्कर नॉलेज

ट्रेन में कोच व सिटिंग कैपेसिटी

हनुमानगढ़-कोटा एक्सप्रेस ट्रेन में सेकंड एसी का एक, थर्ड एसी के दो, स्लीपर के आठ, जनरल के छह, दो एसएलआर कोच हैं। इन कोच में क्रमश: 46, 128, 576 व 625 यानी कुल 1375 यात्री एक साथ सफर कर सकते हैं।



श्रीगंगानगर से हनुमानगढ़ ट्रैक: 67 किमी, रफ्तार: 50 किलोमीटर प्रति घंटा, स्टॉपेज: सादुलशहर

पहले: 2.00 अब: 1.45 घंटे

नगर संवाददाता - श्रीगंगानगर

श्रीगंगानगर रेलवे स्टेशन को मॉडर्न स्टेशन का दर्जा मिले 11 साल हो चुके हंै। जिला मुख्यालय से बीकानेर व अमृतसर के लिए कोई इंटरसिटी ट्रेन नहीं है। ऐसे में मजबूरन यात्रियों को अधिक किराया खर्च कर प्राइवेट व रोडवेज बसों में सफर करना पड़ रहा है।

श्रीगंगानगर-सूरतगढ़ के बाद अब हनुमानगढ़ ट्रैक भी ब्रॉडगेज हो चुका है। अब जिलेभर के लोगों को यहां से जोधपुर, बाड़मेर, सूरतगढ़, अहमदबाद, मुंबई, लुधियाना के अलावा पंजाब के अन्य स्टेशनों पर जाने के लिए लंबी दूरी की और ट्रेनें मिलने की दरकार है। हनुमानगढ़ के लिए भी शीघ्र पैसेंजर ट्रेन का संचालन शुरू होने की उम्मीद है।

हनुमानगढ़ के लिए शुरू हुई इस ट्रेन का किराया सादुलशहर तक बस के बराबर है। ट्रेन व बस दोनों में मंडी तक जाने के लिए 30 रुपए लगते हंै। यह कहना है राजेंद्र का। वह सादुलशहर से हर रोज नर्सिंग कोर्स करने के लिए अपडाउन करते हैं। उन्होंने कहा कि ट्रेन चलते से बसों की मनमानी जरूर कम होगी। हां पूरा फायदा मंथली पास बनने और पैसेंजर ट्रेन के शुरू होने से ही मिलेगा, क्योंकि सादुलशहर के बाद इस ट्रेन का ठहराव सीधे हनुमानगढ़ जंक्शन रेलवे स्टेशन पर है।



नई ट्रेन में सफर कर यादगार पलों का हिस्सा बनने के लिए हनुमानगढ़ जा रहा हूं। लंबे समय से सोच रहा था कि आखिर ट्रेन कब शुरू होगी। यह कहना है श्रीगंगानगर के श्याम चौहान का, जो इस ऐतिहासिक सफर का हिस्सा बनने के लिए शाम को ट्रेन से हनुमानगढ़ रवाना हुए। उन्होंने बताया कि वहां रिश्तेदारों से मिलकर कल इसी ट्रेन से दोबारा श्रीगंगानगर लौट आऊंगा। बस में तो दो साल से जा ही रहे हंै। अब नई ट्रेन का सफर भी करके देख लें।

ठ्ठ 28 फरवरी 2012 को श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ ट्रैक पर रेलगाडिय़ों का आवागमन बंद हुआ। रात 8.05 बजे आखिरी बार यहां से मीटरगेज लाइन पर हनुमानगढ़ पैसेंजर ट्रेन रवाना हुई। फिर तत्कालीन डीआरएम एसएस गुप्ता ने हनुमानगढ़ के जंक्शन रेलवे स्टेशन पर ब्रॉडगेज के कार्य का शिलान्यास किया।

ठ्ठ 31 मई 2012 को ट्रैक पर ब्रॉडगेज पटरियां बिछाने का काम पूरा कर लिया गया, क्योंकि ट्रैक महज 67 किमी लंबा था। काम की तेजी को देख लगा कि इसी वर्ष ब्रॉडगेज के नए ट्रैक पर हनुमानगढ़ के लिए ट्रेन शुरू हो जाएगी। यात्रियों को श्रीगंगानगर-सूरतगढ़ ट्रैक के शुरू होने की तरह ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

ठ्ठ 18 जुलाई 12 को चीफ इंजीनियर चाहतेराम टीम के साथ जयपुर से यहां आए। उन्होंने हनुमानगढ़ ट्रैक का मोटर ट्रॉली से श्रीगंगानगर तक जायजा लिया। भवनों के साथ ट्रैक पर हुए कार्यों में रही कमियों को सीआरएस के दौरे से पहले दुरुस्त करने के लिए कहा।

ठ्ठ 13 दिसंबर 12 को इस ट्रैक पर मशीनी पैकिंग का फस्र्ट फेज पूरा हुआ। बाद में दो बार पैकिंग और हुई। क्रॉसिंग के लिए कई स्टेशनों पर कांटे डाले गए। यह काम भी रेलवे ने काफी तेजी से पूरा किया।

ठ्ठ 17 जनवरी 13 को ट्रैक पर पहली बार ईपीटी ट्रेन चलाई गई। 30 से अधिक बोगियों को इस ट्रैक पर चलाकर पटरियों को बैलेंस किया गया। साथ ही जहां पर गिट्टी कम ज्यादा थी, उसे दुरुस्त करवाया।

ठ्ठ 30 जनवरी 13 को ट्रैक पर बिल्डिंग वर्क का काम कंपलीट कर लिया गया। ट्रैक पर आने वाले सभी स्टेशनों पर बने नए भवनों को रंगरोगन कर चकाचक कर दिया ताकि ट्रैक जल्द से जल्द शुरू हो सके।

ठ्ठ 31 मार्च 13 को पटरियों पर वैल्डिंग वर्क का काम कंपलीट हुआ। पहले ट्रैक पर मैन्यूअल पैकिंग की गई। बाद में मशीनी पैकिंग का चरण शुरू हुआ, जिसे रेलवे ने एक महीने में पूरा कर लिया।

ठ्ठ 07 अप्रैल 13 को इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल का काम पूरा हुआ, जोकि पांच जनवरी को शुरू हुआ था। पहले ट्रैक पर इलेक्ट्रोनिक सिग्नल लगाने का विचार नहीं था। बाद में यह निर्णय हुआ। टेंडर लेट होने से इस काम को ठेकेदार भी तय समय पर पूरा नहीं कर पाया।

ठ्ठ 15 अप्रैल 13 को ट्रैक का स्पीड ट्रायल हुआ। 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से इंजन को दौड़ाया गया। 67 किमी की दूरी ट्रेन ने महज 50 मिनट में पूरी कर ली। रेलवे अधिकारियों ने ट्रैक को ओके बताया।

ठ्ठ 10-11 दिसंबर को ट्रैक पर सीआरएस का दौरा हुआ। पहले दिन सीआरएस, सीईओ व डीआरएम ने मोटर ट्रॉली से दो चरणों में ट्रैक का निरीक्षण किया। अगले दिन 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ी ट्रेन 37 मिनट में हनुमानगढ़ पहुंची।

ठ्ठ 17 दिसंबर को सीआरएस पीएस बघेल ने मुंबई से ट्रैक के ओके होने की रिपोर्ट जारी की। कुछ बिंदुओं के लिए बीकानेर मंडल के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

ठ्ठ 27 दिसंबर को बीकानेर मंडल की डीआरएम को हनुमानगढ़ ट्रैक के ओके होने की रिपोर्ट मिली। उन्होंने ट्रेन चलाने के लिए रेलवे बोर्ड से अनुमति मांगी।

ठ्ठ 24 जनवरी 14 को जयपुर में रेलवे के चीफ पैसेंजर ट्रैफिक आरके मीणा ने सांसद भरतराम को 29 जनवरी से हनुमानगढ़ ट्रैक पर हनुमानगढ़-कोटा एक्सप्रेस ट्रेन के संचालन संबंधी पत्र दिया।