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दोनों जिलों में गेहूं में येलोरस्ट की आशंका, टीम करेगी सर्वे

7 वर्ष पहले
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नगर संवाददाता - श्रीगंगानगर
श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिले में गेहूं की फसल पर येलोरस्ट रोग फैलने की आशंका है। दोनों जिलों में कहीं कहीं यह रोग रिपोर्ट हुआ है। बुधवार को एआरएस पर हुई कृषि अधिकारियों की मासिक कार्यशाला में इस पर चर्चा हुई। अब कृषि अधिकारियों व वैज्ञानिकों की टीम 3 फरवरी से रोग से प्रभावित क्षेत्र का दौरा करेगी। कार्यशाला में लोकसभा की आचार संहिता लगने के दृष्टिगत 15 फरवरी तक किसान मेलों, गोष्ठियों व अन्य काम पूरे करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए।
अधिकारियों ने बताया कि हनुमानगढ़ जिले में नोहर और श्रीगंगानगर जिले में एचएच नहर क्षेत्र में गेहूं की फसल के पत्तों पर येलोरस्ट के लक्षण दिखे हैं। दोनों जिलों में गेहूं का रकबा पांच लाख हैक्टेयर है। अधिकारियों के अनुसार फील्ड स्टाफ को किसानों के पास जाकर रोग के लक्षणों की पहचान करने और रोकथाम के उपाय बताने के के लिए कहा जाएगा। कार्यशाला में एआरएस के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. बीएस यादव, डॉ. दाताराम, कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक वीएस नैण, कार्यवाहक उप निदेशक श्रीगंगानगर वासुदेव मिगलानी, उप निदेशक हनुमानगढ़ डॉ. उदयभान सहित दोनों जिलों के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।



क्या है येलोरस्ट

गेहूं की पत्तियों को पीला करने वाला यह रोग सर्दियों में नमी बढऩे पर फैलता है। इस रोग के बीजाणु नमी बढऩे पर सक्रिय हो जाते हैं। इससे पत्तियों पर पीले रंग के धब्बे पड़ जाते हैं। इससे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया मंद होने से पौधा कमजोर होता है। इससे उत्पादन में कमी आती है।

ऐसे करें उपचार

बिजाई के समय बीज को वीटावेक्स से उपचारित करना चाहिए। इससे फसल में येलोरस्ट प्रतिरोधी बनती है। रोग के लक्षण दिखने पर डाईथेम-45 का दो एमएल को एक लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए।