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आरएयू मार्च के बाद लेगी नए रिसर्च प्रोजेक्ट

7 वर्ष पहले
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नगर संवाददाता - श्रीगंगानगर
राजस्थान एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी बीकानेर मार्च के बाद ही नए रिसर्च प्रोजेक्ट लेगी। नए वित्तीय वर्ष में तीन नई एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी कोटा, जोबनेर व जोधपुर को उनके क्षेत्र के रिसर्च प्रोजेक्ट पूर्णत: हस्तांतरित कर दिए जाएंगे। आरएयू के डायरेक्टर रिसर्च डॉ. गोविंद सिंह ने गुरुवार को स्थानीय कृषि अनुसंधान केंद्र ने दौरे के दौरान बताया कि इसके बाद बीकानेर यूनिवर्सिटी को विभिन्न जलवायु क्षेत्र में फसलों के ट्रायल लगाने में दिक्कत आएगी। डॉ. सिंह ने बताया कि श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिले में मछलीपालन की संभावना ज्यादा है। इसे देखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से वैज्ञानिकों के पद स्वीकृति करने की मांग की गई है।
डायरेक्टर रिसर्च ने एडिशनल डायरेक्टर डॉ. आरएस यादव, डॉ. एनके शर्मा व डॉ. पी पुंडीर व एआरएस के वैज्ञानिकों के साथ एआरएस पर होने वाले फसलों के ट्रायल का अवलोकन किया। विभिन्न ट्रायल की प्रगति का जायजा लिया। वैज्ञानिकों के साथ बैठक कर गन्ना, कपास, सरसों, गेहूं, चना व अन्य फसलों के रिसर्च प्रोजेक्ट्स व समस्याओं पर चर्चा की। बैठक में एआरएस के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. बीएस यादव, डॉ. यूएस शेखावत, बीएस सिद्धू, डॉ. एके श्रीवास्तव, डॉ. बीआर गोदारा, डॉ. बीना श्रीवास्तव, डॉ. एसके बैरवा आदि उपस्थित थे।




आरओबी की साइट बदलने के लिए सरकार को लिखा पत्र

डायरेक्टर रिसर्च ने बताया कि करणी मार्ग पर प्रस्तावित आरओबी बनने से एआरएस पर रिसर्च प्रभावित होगा। इसके दुष्प्रभावों से सरकार को अवगत करवा दिया गया है। इसकी साइट बदलने के लिए सरकार को पत्र लिखा गया है। वैज्ञानिकों के साथ हुई चर्चा में एआरएस पर जैव फफूंदनाशी ट्राइकोडर्मा उत्पादन का लाइसेंस लेने पर भी विचार हुआ। डायरेक्टर डॉ. सिंह ने कहा कि इसके यूनिवर्सिटी के उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।