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पोस्टमार्टम रिपोर्ट मांगी तो, अस्पताल प्रशासन ने कहा- पहले कारण बताओ

7 वर्ष पहले
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नसं, श्रीगंगानगर। चार माह पहले सड़क हादसे में परिवार के तीन सदस्य खाने के गम में डूबा मांझूवास निवासी प्रेमकुमार पिछले दस दिन से पोस्टमार्टम की रिपोर्ट लेने के लिए जिला अस्पताल के चक्कर लगा रहा है। एक अक्टूबर, 13 को गुरुसर मोडिया से आ रहा टैंपो दुर्घटनाग्रस्त होने से प्रेमकुमार के परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई थी। प्रेम कुमार के अनुसार तीनों परिजनों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के लिए बहाने बनाए जा रहे हैं। आरोप है कि उसे दस दिन से रिपोर्ट नहीं मिली। कभी रिपोर्ट लेने का कारण न बताने और कभी डॉक्टर के न होने का कहते हुए उसे टरकाया जा रहा है।

प्रेम कुमार के अनुसार वह अपने ताऊ हरीराम के साथ 20 जनवरी को पोस्टमार्टम रिपोर्ट लेने के लिए आया था। तब पीएमओ को परिवाद दिया और पीएमओ ने फीस जमा कराने के लिए मार्क किया। फीस जमा करवाने के बाद परिवाद मेडिकल ज्यूरिस्ट को दिया तो बाद में आने के लिए कहा गया। दो तीन दिन बाद फिर अस्पताल आया तो उसे कहा कि जब तक लिखित में यह नहीं बताया जाएगा कि वह रिपोर्ट क्यों लेना चाहता है, तब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं दी जाएगी। इसके बाद उसने बताया कि आर्थिक सहायता लेने के लिए पटवारी को रिपोर्ट देनी है। इसके बाद डॉक्टर छुट्टी पर होने की बात कहते हुए रिपोर्ट नहीं दी गई।





‘डॉक्टर अंजान, परिवादी को परेशानी’

एमजे डॉ. एसएम बतरा के अनुसार पीएमओ ने परिवाद एमओ रिकॉर्ड रूम के लिए मार्क किया था। विभाग में चालू माह का रिकॉर्ड ही रखा जाता है। पुराना रजिस्टर व अन्य दस्तावेज रिकॉर्ड रूम में जमा करवा दिए जाते हैं। उनके विभाग में नए डॉ. बंसल को इस व्यवस्था का पता नहीं था। इसी वजह से परिवाद उनके यहां पेंडिंग रहा। परिवाद को रिकॉर्ड रूम से जल्द ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट दिलवा दी जाएगी।

नगर संवाददाता - श्रीगंगानगर

चार माह पहले सड़क हादसे में परिवार के तीन सदस्य खाने के गम में डूबा मांझूवास निवासी प्रेमकुमार पिछले दस दिन से पोस्टमार्टम की रिपोर्ट लेने के लिए जिला अस्पताल के चक्कर लगा रहा है। एक अक्टूबर, 13 को गुरुसर मोडिया से आ रहा टैंपो दुर्घटनाग्रस्त होने से प्रेमकुमार के परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई थी। प्रेम कुमार के अनुसार तीनों परिजनों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के लिए बहाने बनाए जा रहे हैं। आरोप है कि उसे दस दिन से रिपोर्ट नहीं मिली। कभी रिपोर्ट लेने का कारण न बताने और कभी डॉक्टर के न होने का कहते हुए उसे टरकाया जा रहा है।

प्रेम कुमार के अनुसार वह अपने ताऊ हरीराम के साथ 20 जनवरी को पोस्टमार्टम रिपोर्ट लेने के लिए आया था। तब पीएमओ को परिवाद दिया और पीएमओ ने फीस जमा कराने के लिए मार्क किया। फीस जमा करवाने के बाद परिवाद मेडिकल ज्यूरिस्ट को दिया तो बाद में आने के लिए कहा गया। दो तीन दिन बाद फिर अस्पताल आया तो उसे कहा कि जब तक लिखित में यह नहीं बताया जाएगा कि वह रिपोर्ट क्यों लेना चाहता है, तब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं दी जाएगी। इसके बाद उसने बताया कि आर्थिक सहायता लेने के लिए पटवारी को रिपोर्ट देनी है। इसके बाद डॉक्टर छुट्टी पर होने की बात कहते हुए रिपोर्ट नहीं दी गई।