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यूनिसेफ ने कहा-धमाका कुई पद्धति से बने शौचालय खतरनाक

8 वर्ष पहले
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नगर संवाददाता - हनुमानगढ़
निर्मल भारत अभियान के तहत हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिले में हजारों शौचालय बनाने के लिए ग्रामीणों को दी गई करोड़ों रुपए की राशि व्यर्थ साबित हो गई है। यूनिसेफ की टीम ने कहा है सरकारी सहायता से बनी धमाका कुई आधारित शौचालय स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरनाक हैं। इसलिए इन शौचालयों की बजाय सोख्ता गड्ढे वाली नई तकनीक के शौचालय बनवाने जरूरी हैं। यूनिसेफ ने इस संबंध में गाइड लाइन जारी की हैं। जिसमें इस पर सुधार पर जोर दिया है। यूनिसेफ की टीम ने इस संबंध दोनों जिलों मे सर्वे किया था, उसके बाद गाइड लाइन जारी हुई। धमाका कुई आधारित शौचालयों के खारिज होने की वजह से ही पिछले दो साल से जिले का एक भी गांव निर्मल ग्राम के लिए चयनित नहीं हो पाया। अधिकारियों के मुताबिक धमाका कुई आधारित शौचालय हनुमानगढ़ व श्रीगंगानगर जिलों में ही हैं और इनकी संख्या हजारों में है।
॥नई गाइडलाइन के मुताबिक धमाका कुई पद्धति पर बने शौचालयों को खारिज माना जा रहा है। जिले के गांवों का चयन निर्मल ग्राम योजना के तहत नहीं हो रहा है। अब नई तकनीक के आधार पर शौचालय बनाए जाएंगे, धमाका कुई में सुधार का प्रयास पर भी विचार किया जा रहा है।
सुनीता राठौड़, जिला समन्वयक, निर्मल भारत अभियान