युवा भारत फहराए तिरंगा
सिटी रिपोर्टर जयपुर
आज भारत आर्थिक महाशक्ति बनने के मार्ग पर अग्रसर है और वैश्विक धरातल पर एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। हमारे युवाओं का यह कर्तव्य है कि वे अपने झंडे के मूल्यों को आगे बढ़ाएं और यह सुनिश्चित करें कि विश्व में हमारा तिरंगा सदा ही ऊंचा लहराए।
नब्बे के दशक में डलास में टेक्सास यूनिवर्सिटी के अपने छात्र जीवन के दौरान मैंने अमेरिकी लोगों का अपने राष्ट्रीय ध्वज के प्रति एक अनूठा प्रेम और दीवानापन देखा। चाहे अपने घर के बाहर झंडा फहराना हो या ‘सितारों और पट्टियों’ जड़े परिधानों को पहनना हो, हर जगह यह अमेरिकी नागरिकों का अपने राष्ट्रीय ध्वज के प्रति गर्व को दर्शाता है।
उनके इस दीवानेपन को देखकर मैंने सोचा कि भारत में ऐसा क्यों नहीं हो सकता? स्वतंत्रता के 40 वर्षों के बाद भी भारत के लोगों को अपनी इच्छा से अपना झंडा फहराने और राष्ट्रीय गर्व को अभिव्यक्त करने की आजादी नहीं थी। जब मैं भारत वापस आया तो मुझे रायगढ़ में अपनी फैक्ट्री में झंडा फहराने की अनुमति नहीं दी गई थी। फिर मैंने सभी भारतीयों की तरफ से इस मुद्दे को जोरदार ढंग से उठाया।
मैं जब भी तिरंगे को देखता हूं तो मुझे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के कहे ये शब्द याद आ जाते हैं, ‘ मैं एक ऐसे भारत के लिए काम करूंगा, जिसमें एक आम आदमी इस अहसास के साथ जिएगा कि यह उसका अपना देश है, जिसमें वो अपनी बात को प्रभावी ढंग से कह सकेगा।
((लेखक कुरुक्षेत्र से लोकसभा सदस्य हैं और उन्होंने एक दशक तक लंबी कानूनी लड़ाई लड़कर प्रत्येक भारतीय नागरिक के लिए राष्ट्रीय ध्वज फहराने का अधिकार दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।))
जैसा कि नवीन जिंदल ने सिटी भास्कर
रिपोर्टर को बताया।
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