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मूंगफली पर 1.60 फीसदी मंडी शुल्क की वसूली

8 वर्ष पहले
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वाणिज्य संवाददाता - जयपुर
सरसों, सोयाबीन और तिल्ली तिलहन पर राज्य सरकार वर्तमान में एक फीसदी मंडी शुल्क ले रही है, जबकि मूंगफली पर 1.60 प्रतिशत मंडी शुल्क लिया जा रहा है। व्यापारियों ने कई बार इस ओर सरकार का ध्यान भी आकर्षित किया है, लेकिन हुआ कुछ नहीं।
राजस्थान मूंगफली पंखा ((दाना)) प्रोसेशर्स एसोसिएशन के महामंत्री छीतरमल सैनी बताते हैं कि सरकार ने मूंगफली को दलहन का दर्जा दिया हुआ है, जबकि यह तिलहन है। मगर सभी दलहन वैट मुक्त हैं, जबकि मूंगफली पर बिक्रीकर विभाग पांच फीसदी वैट भी वसूल रहा है। दुतरफा टैक्स की मार होने प्रदेश के मूंगफली प्रोसेशर्स संकट में आए हुए हैं।



गौरतलब है कि इस साल देश में मूंगफली का बंपर उत्पादन हुआ है। अकेले राजस्थान में नौ लाख टन मूंगफली उत्पादन का अनुमान है। इसके बावजूद राज्य की करीब 70\\\' प्रोसेसिंग इकाइयां बंद पड़ी हैं। मंडी शुल्क कम होने से जोधपुर व बीकानेर साइड के किसान गुजरात जाकर मूंगफली बेच रहे हैं।




क्या हैं व्यापारियों की मांगें

> सरसों, सोयाबीन एवं तिल्ली पर एक फीसदी मंडी सेस है, लिहाजा मूंगफली पर भी शुल्क एक प्रतिशत किया जाए। कर विसंगतियों के चलते प्रदेश की अधिकांश इकाइयां बंद हैं।

> मूंगफली को सरकार ने दलहन का दर्जा दे रखा है, चूंकि सभी दाल व दलहन वैट मुक्त हैं। अत: मूंगफली को भी वैट फ्री किया जाए। वर्तमान में विभाग मूंगफली व्यापारियों से पांच फीसदी वैट की वसूली कर रहा है।

तिलहनों पर घटे मंडी शुल्क

॥ गुजरात की तर्ज पर राजस्थान में भी तिलहनों पर 0.5 फीसदी मंडी शुल्क लिया जाए।

-बाबूलाल गुप्ता अध्यक्ष राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ