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बैंक में फिर घुसे चोर, नहीं टूटा स्ट्रांग रूमलूनियावास बस स्टैंड पर एसबीआई में तीसरी बार चोरी का प्रयास, स्ट्रांग रूम में करीब 34 लाख रु. कैश व गहने रखे थे, पुलिस का मानना-सुरक्षित नहीं है भवन

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - जयपुर
गोनेर रोड के लूनियावास बस स्टैंड पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ((एसबीआई)) की शाखा में मंगलवार रात ताले तोड़कर घुसे नकाबपोश स्ट्रांग रूम तोडऩे में नाकामयाब रहे। पिछले करीब छह माह में यह तीसरी घटना है। दो बार पहले भी बैंक की दीवार में सुराख कर ताले तोड़े गए थे। वारदात के तरीके से पुलिस को किसी स्थानीय बदमाश या गिरोह पर शक है।
दिन में ड्यूटी करके गया चौकीदार मदन लाल बुधवार सुबह 9:30 बजे शाखा के अंदर पहुंचा तो सीसीटीवी कैमरों के कटे हुए तार और फर्श पर टूटे ताले पड़े देखकर बैंक प्रबंधक गीतांजली अग्रवाल को सूचना दी। उसके बाद डीसीपी पूर्व अमनदीप सिंह कपूर, एसीपी ((सांगानेर)) बाघसिंह समेत एफएसएल व फिंगर प्रिंट टीम और डॉग स्क्वाड मौके पर पहुंचे। एसीपी के मुताबिक बैंक के स्ट्रांग रूम में दो तिजोरी हैं, जिसमें सोने-चांदी के आभूषण और करीब 34 लाख रु. रखे थे।
देर रात करीब 12:30 बजे बदमाशों ने
बैंक के पीछे की दीवार को दो-तीन जगहों से तोडऩे की कोशिश की, पर मोटी होने से टूटी नहीं तो बदमाश पड़ोस की दीवार से होकर बैंक की छत पर चढ़ गए। फिर आरसीसी की छत के एक कोने में लगे सरियों पर कपड़ा बांधकर नीचे उतरे और पिछले हिस्से में बने लोहे का दरवाजा मोड़कर अंदर घुस गए। बदमाशों ने स्ट्रांग रूम तक पहुंचने के लिए एक दरवाजे पर लगे चार ताले तोड़े और उसके बाद स्ट्रांग रूम का लॉक तोडऩे का प्रयास किया, लेकिन असफल रहे। पुलिस का मानना है कि बदमाशों को छत पर लगे लोहे के जाल के बारे में पहले से जानकारी थी।
सीसीटीवी कैमरों के तार काटे
बैंक में तीन सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। एक मुख्य गेट पर, दूसरा पिछले गेट पर और तीसरा स्ट्रांग रूम के दरवाजे पर। रात 1 बजे बदमाशों की नजर अंदर के दोनों कैमरों पर पड़ी तो उन्होंने तार काट दिए, हालांकि उससे पहले फुटेज में उनकी गतिविधि व हुलिया कैद हो गया, पर वह साफ नहीं है। इसी तरह एक अलार्म भी लगा है जो कि फायर सेंसर से युक्त है, पर वो बजा नहीं।



डीसीपी अमनदीप सिंह के मुताबिक, जिस मकान में बैंक चल रहा है, उसकी छत पूरी तरह से नहीं बनी है। एक कोना सिर्फ लोहे के जाल से ढंका है। पीछे की दीवार में सीलन आ रही है। सड़क पर पुलिस की गश्त होने से बदमाशों ने नकबजनी के लिए पीछे खेत का रास्ता चुना। बैंक प्रबंधन ने पहले दो बार हुई वारदात के बाद सावधानी नहीं बरती। इन कमियों को दुरुस्त करने के लिए बैंक अधिकारियों को फिर से पत्र लिखा जाएगा।