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सदन लोकतंत्र का रथ, अध्यक्ष सारथी : वसुंधरा
भास्कर न्यूज - जयपुर
विधानसभा में वसुंधरा राजे ने कहा, सदन लोकतंत्र का रथ है और अध्यक्ष उसके सारथी। लोकतंत्र रूपी रथ में पक्ष और विपक्ष दो पहिए होते हैं। इन्हें संतुलन में बनाए रखने में अध्यक्ष की अहम भूमिका है।
राजे ने अध्यक्ष को विश्वास दिलाया कि प्रदेश के विकास के लिए जहां-जहां प्रतिपक्ष के सदस्यों से विचार विमर्श की आवश्यकता होगी, वे निश्चित रूप से करेंगी। विधानसभा में पक्ष और प्रतिपक्ष मिलकर जनता के विश्वास पर खरा उतर कर लोकतंत्र की परंपराओं को और मजबूत करेंगे। प्रदेश के विकास में न कोई पक्ष है और न कोई प्रतिपक्ष। सबको जनता ने चुनकर भेजा है। मिलकर राज्य के नवनिर्माण के लिए खुले दिल से संवाद करेंगे।
चौदहवीं का चांद हो...
जब कैलाश मेघवाल ने अध्यक्ष पद ग्रहण किया और आसन पर विराजे, तो प्रद्युम्न सिंह बोले, आप बेहद हंसमुख हैं, स्नेही हैं। लेकिन इस समय आप बेहद गंभीर भाव में दिख रहे हैं। थोड़ा हंसिये तो सही। इस पर मेघवाल बोले, आप हंसाने वाली बात करो तो हंस दूंगा। इस पर घनश्याम तिवाड़ी ने चुटकी ली, कहा, गंभीर क्यों हैं अध्यक्षजी। आपका बोझ तो कम हुआ है। इसी बीच उन्होंने तारीफ करते हुए मेघवाल के लिए हिंदी फिल्म का गाना ‘चौदहवीं का चांद हो या आफताब हो, जो भी हो तुम खुदा की कसम, लाजवाब हो...’ गुनगुनाया। इस पर चौदहवीं विधानसभा के अध्यक्ष बने मेघवाल की हंसी छूट पड़ी।
जयकारा तेजाजी का
बुधवार को हबीबुर्रहमान ने उर्दू में और वासुदेव देवनानी, शंकरसिंह राजपुरोहित, शैतानसिंह, श्रीचंद कृपलानी, हीरालाल, सुरेश धाकड़ और विट्ठलशंकर अवस्थी ने संस्कृत में शपथ ली। हनुमान बेनीवाल ने शपथ के बाद जोर से तेजाजी का जयकारा लगाया। सूर्यकांता व्यास का जैसे ही नाम पुकारा, सभी सदस्यों ने मेज थपथपा उनका स्वागत किया।
पक्ष-विपक्ष चंद्रमा और निशा जैसे
घनश्याम तिवाड़ी ने अध्यक्ष मेघवाल का स्वागत करते हुए संस्कृत ‘श्लोक शशिना निषया निषयाश्च शशि...’ सुनाकर विधानसभा में पक्ष-विपक्ष की भूमिका तथा अध्यक्ष की व्यवस्था को समझाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह चंद्रमा का रात्रि से और रात्रि का चंद्रमा के बिना काम नहीं चलता। दोनों मिलकर आकाश की शोभा बनते हैं। उसी तरह पक्ष के बिना प्रतिपक्ष का और प्रतिपक्ष के बिना पक्ष का काम नहीं चलता। दोनों मिलकर आसन की शोभा बनते हैं।