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गोडावण बचाने के लिए अब कैप्टिव ब्रीडिंग

8 वर्ष पहले
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महेश शर्मा - जयपुर
पूरी तरह संकटग्रस्त राज्य पक्षी ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ ((गोडावण)) को बचाने के लिए अब आखिरी हथियार के रूप में ‘कैप्टिव ब्रीडिंग’ का सहारा लिया जाएगा। इसके लिए केन्द्र सरकार ने राज्य सरकार को प्रोजेक्ट तैयार कर काम करने को कहा है।
योजना मुताबिक राजस्थान के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र जैसे प्रदेश जहां गिने-चुने गोडावण मौजूद हैं, वे भी इस प्रोजेक्ट पर मिलकर काम करेंगे। इसके अलावा प्रोजेक्ट को वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाने के लिए वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ((डब्ल्यूआईआई)), बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी ((बीएनएचसी)) के अलावा इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर ((आईयूसीएन)) बस्टर्ड स्पेशलिस्ट ग्रुप, वल्र्ड वाइल्ड लाइफ फंड ((डब्ल्यूडब्ल्यूएफ)) की भी मदद ली जाएगी। चूंकि देशभर में बचे करीब 225-250 गोडावण में से सर्वाधिक राजस्थान में ((करीब 85)) होने से कैप्टिव ब्रिडिंग के तौर पर सेंटर बनाने के अलावा इस प्रोजेक्ट की सफलता की उम्मीद राजस्थान पर सर्वाधिक टिकी है।




देश में पहला प्रयोग होगा

एक्स-सीटू अर्थात संरक्षण में ब्रीडिंग को बढ़ावा देना। कैप्टिव ब्रीडिंग के लिए गोडावण के ब्रीडिंग एरिया से उसके दो-चार अंडे लेकर आर्टिफिशियल हैच करके उनको वैज्ञानिक तरीके से पाला जाएगा। बच्चों को बड़ा करने में सफलता मिलने पर इन्हें वापस इनके प्राकृतिक स्थलों पर छोड़ा जाएगा। फॉरेस्ट मिनिस्ट्री ने योजना की शुरुआत के लिए एक रफ एस्टीमेट के तौर पर जानकारों से 30 करोड़ रुपए का एस्टीमेट तैयार कराया है। इसमें आधा शेयर मिनिस्ट्री उठाएगी। चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन एएस बरार का कहना है प्रदेश में हैबिटेट इंप्रूवमेंट की योजना चल रही है, लेकिन अब कैप्टिव ब्रीडिंग पर अभी से काम नहीं किया गया तो जैसे हालात बन रहे हैं, उसमें गोडावन हाथ से निकल जाएगा।