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00 बरसों बाद सुनाई दिया संपूर्ण मालकौंसराग मालकौंस और भैरव का मिश्रित राग है संपूर्ण मालकौंस, अल्लाहदिया खां संगीत समारोह में आरती अंकलेकर ने दी इस अप्रचलित राग की प्रस्तुति

8 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर जयपुर
जवाहर कला केंद्र में बुधवार को संगीत प्रेमियों को बरसों बाद भैरव थाट के राग संपूर्ण मालकौंस के स्वर सुनाई दिए। मौका था केंद्र में शुरू हुए तीन दिवसीय अल्लाहदिया खां स्मृति शास्त्रीय संगीत समारोह के दौरान मुंबई की गायिका आरती अंकलेकर की प्रस्तुति का।
आरती ने पहले कल्याण थाट के राग नंद की प्रस्तुति दी और इसके बाद भैरव थाट का राग संपूर्ण मालकौंस प्रस्तुत किया। उनका गायन शास्त्रीय संगीत के गहरे ज्ञान में डूबा हुआ था जिसमें संगीत के कई घरानों की महक संगीत प्रेमियों को सराबोर कर रही थी। उनके साथ तबले पर विनोद लेले तथा हारमोनियम पर विनय मिश्रा ने संगत की।
राग संपूर्ण मालकौंस
इस राग में कलाकार ने विलंबित तीन ताल की बंदिश बरज रही, आड़ा चौताल में चलो हटो पिया और तीन ताल में बनवारी श्याम मोरे जैसी पारंपरिक बंदिशों को अपनी पुरकशिश आवाज से और भी रोचक बना दिया। राग संपूर्ण मालकौंस उन्नीसवीं सदी का राग माना जाता है। इस राग की आलापचारी राग मालकौंस में होती है जिसमें षडज़, गंधार, मध्यम, धैवत और निषद स्वरों का प्रयोग किया जाता है, जबकि राग का शेष भाग भैरवी में गाया बजाया जाता है। इस दौरान सातों सुरों का प्रयोग होता है।
गूंजे राग नंद के स्वर
इससे पूर्व आरती ने कल्याण थाट का राग नंद पेश किया। इसमें उन्होंने तीन ताल की बंदिश ढूंढ वारे सैंया... और तीन ताल में ही पायल मोरी बाजे... की मनभावन प्रस्तुति दी। इसमें उन्होंने दोनों मध्यमों का बड़े ही प्रभावी अंदाज में राग के अन्य स्वरों के साथ मिश्रित कर राग की प्रकृति को जीवंत कर दिया। समारोह के तहत गुरुवार शाम 6:30 बजे मुंबई के ही सरोद वादक बृजनारायण प्रस्तुति देंगे।