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राज्यपाल का अभिभाषण पढ़ा मानने पर भड़के विधायक

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - जयपुर
विधानसभा में राज्यपाल मारग्रेट अल्वा के अभिभाषण को पढ़ा हुआ मान लेने के प्रस्ताव पर भाजपा विधायक राव राजेंद्र सिंह गुरुवार को अपनी ही सरकार के खिलाफ खड़े हो गए। अल्वा अभिभाषण पढ़ रही थीं तो संसदीय कार्य मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने प्रस्ताव रखा कि यदि सदन की अनुमति हो तो अभिभाषण को पढ़ा हुआ मान लिया जाए। इसके बाद अभिभाषण पढ़ा हुआ मान लिया गया। इस व्यवस्था के खिलाफ राव राजेंद्र ने कहा- हमने यह परंपरा बना ली है कि किसी सदस्य के कहने पर अभिभाषण को पढ़ा मान लेते हैं। शेष - पेज ६


राज्यपाल चाहे जिस भाषा में पढ़ें। यदि वह मान्यताप्राप्त है तो हमारा अधिकार है कि हम संपूर्ण भाषण सुनें। जवाब में विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने स्पष्ट किया कि राज्यपाल ने खुद यह मंशा जाहिर की थी कि वे कुछ अंश पढ़ेंगी, उसके बाद अभिभाषण को पढ़ा मान लिया जाए। इसलिए यह व्यवस्था दी गई। राव राजेंद्र ने फिर खड़े होकर कहा- इस प्रकार तो यह व्यवस्था बन जाएगी। इस पर प्रद्युम्न सिंह ने अध्यक्ष से आग्रह किया कि वे इस विषय पर अलग से सर्वदलीय बैठक बुलाकर कोई व्यवस्था बनाएं।
निर्णय एक व्यक्ति का नहीं : राठौड़
राजेंद्र राठौड़ ने कहा- निर्णय किसी एक व्यक्ति का नहीं था। सबकी मूक सहमति थी। इसलिए मुझे नहीं लगता कि इस मुद्दे पर बहस होनी चाहिए। नियमों के तहत कहीं भी यह व्यवस्था नहीं है कि भाषण को अक्षरश:: पढऩा पड़ेगा। इस मुद्दे पर डॉ. किरोड़ीलाल मीणा, मंत्री गुलाबचंद कटारिया, हनुमान बेनीवाल ने भी अपनी बात कहनी चाही, लेकिन व्यवधान होता रहा।