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एडीजे की अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश रद्द, बहाल किया
जयपुर - हाईकोर्ट ने सूरतगढ़ के तत्कालीन एडीजे की अनिवार्य सेवानिवृत्ति के राज्य सरकार के 31 दिसंबर 2010 के आदेश को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह एडीजे को सभी परिलाभ सहित सेवा में वापस बहाल करें। न्यायाधीश अजय रस्तोगी व जेके रांका की खंडपीठ ने यह आदेश भंवरलाल लामरोर की याचिका स्वीकार कर दिया। अधिवक्ता शोभित तिवारी ने बताया कि प्रार्थी 1988 में न्यायिक अफसर नियुक्त हुए और 2003 में उन्हें सूरतगढ़ एडीजे ((फास्ट ट्रेक कोर्ट)) नियुक्त किया। इसी दौरान 2 मार्च 2010 को हाईकोर्ट की पूर्णपीठ की बैठक हुई जिसमें प्रार्थी की सर्विस के अच्छे रिकार्ड को नजर अंदाज कर राज्य सरकार को उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की सिफारिश की। सरकार ने प्रार्थी को 31 मार्च 2010 के आदेश से अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी। इसे हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि प्रार्थी के खिलाफ जिस टिप्पणी को निरस्त किया था उसे ही अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए आधार बनाया है। प्रार्थी पर प्रोबेशन पीरियड में निपटाए मुकदमों की गलत रिपोर्ट देने का आरोप है, लेकिन यह प्रोबेशन में दी थी और जानबूझकर नहीं दी। बाद में स्थायी होने के बाद प्रार्थी ने कोई गलती नहीं की।