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अभिभाषण की भाषा पर भाजपा नेताओं में टकराव

8 वर्ष पहले
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विसं. जयपुर - अभिभाषण की भाषा को लेकर भाजपा नेताओं का टकराव सामने आ गया। राज्यपाल का अभिभाषण पढ़ा हुआ मान लिया गया तो राव राजेंद्र सिंह ने संविधान के अनुच्छेद 176 और 348 की तरफ ध्यान दिलाया। सदन में मामला कुछ देर में शांत हो गया, लेकिन बाद में पंचायती राज मंत्री गुलाबचंद कटारिया ने कहा : राव राजेंद्र सिंह व्यवस्था का प्रश्न उठा ही नहीं सकते। जब राज्यपाल ने हिंदी में ही अभिभाषण शुरू किया और हिंदी में ही खत्म तो व्यवस्था का प्रश्न बनता ही नहीं। वे नाहक ही इस मामले को तूल दे रहे हैं।




आखिर मामला क्या है?

पिछली सरकार के समय जब राज्यपाल पहला अभिभाषण देने लगीं तो भाजपा के घनश्याम तिवाड़ी ने प्रश्न उठाया था कि वे अंग्रेजी में नहीं, हिंदी में बोलें। राज्यपाल ने कुछ शब्द पढ़े और उनका भाषण पढ़ा हुआ मान लिया गया। इस बार सत्ता में भाजपा है तो फिर वही सवाल उठा।

तो क्या राजस्थान इस देश का हिस्सा नहीं : राव

राष्ट्रपति संसद के माध्यम से अंग्रेजी में राष्ट्र को संबोधित करते हैं। क्या राजस्थान देश का हिस्सा नहीं है, कि संविधान की मान्यता प्राप्त भाषा पर सवाल उठ रहे हैं। संविधान में है कि संसद या विधान-मंडल द्वारा बनाए गए आदेशों, नियमों, विनियमों और उपविधियों के प्राधिकृत पाठ अंग्रेजी में होंगे। हम खुद ही अंग्रेजी में नियम बनाते हैं तो फिर सवाल क्यो?



यह करेगी अब नई सरकार, लक्ष्य तय

:विभागों में रिक्त पड़े पदों के साथ-साथ राज्य के बेरोजगारों को नौकरी में आई रुकावट दूर करने के प्रयास शुरू किए।

:बिजली उत्पादक इकाइयों की क्षमता बढ़ाई जाएगी। 50 मेगावाट रामगढ़ स्टीम टरबाइन जेनरेटर से बिजली उत्पादन जल्द शुरू किया जाएगा।

:राज्य राजमार्गों व जिला सड़कों को चौड़ा व सुदृढ़ करने, गांवों की सड़कों का डामरीकरण कराया जा रहा है।

:हाउसिंग बोर्ड 1500 नए मकानों के लिए आवेदन रजिस्टर करेगा। 4 हजार का निर्माण पूरा करेगा व 1500 नए मकानों का निर्माण शुरू करेगा। बीपीएल परिवारों को 30 हजार मकान स्वीकृत किए जाएंगे।

- प्याज उत्पादक किसानों को 700 वैज्ञानिक प्याज भंडारगृह निर्माण के लिए 20 हजार रुपए अनुदान दिया जाएगा।

- मुहाना टर्मिनल मार्केट में पुष्प मंडी स्थापित होगी।



पिछली सरकार की इन मामलों में खिंचाई

:पिछले पांच सालों में राज्य के माथे पर पिछड़ेपन व बीमारू होने का कलंक लगा।

:वार्षिक व पंचवर्षीय योजना की घोषणा के बावजूद उपलब्धि हासिल नहीं।

:किसान बिजली की कमी, महंगे डीजल-खाद से परेशान। महंगाई और जर्जर कानून व्यवस्था से आमजन भयाक्रांत रहा। महिलाएं असुरक्षित रहीं। उत्पीडऩ बढ़ा।

:राजकोषीय घाटा 2008-09 व 2009-10 में बढ़कर 3 प्रतिशत से ज्यादा हो गया।

:व्यक्तिगत लाभ की योजना- टैबलेट, साइकिल, साड़ी वितरण में जल्दबाजी दिखाई। इससे राशि का वांछित वस्तुओं पर उपयोग पूरा नहीं हुआ।

:ऊर्जा क्षेत्र में वित्तीय दायित्व 5 साल में 15 हजार करोड़ रुपए से बढ़कर इस साल 61 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा हो गए। इससे बिजली कंपनियों को प्रतिवर्ष 10 हजार करोड़ रुपए की हानि हो रही है।

:जेडीए भी वित्तीय घाटे की स्थिति में गया। कंगाली के कारण इस साल कर्मचारियों का वेतन लोन लेकर करना पड़ रहा है। परियोजनाओं पर खर्च के लिए माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड को भी बाध्य किया।