संस्कृत कविता विश्व में बेजोड़
सिटी रिपोर्टर जयपुर
संस्कृत की कविता से राष्ट्र के विविध क्षेत्रों की सभ्यताएं जुड़ी हैं। संस्कृत संस्कारों की भाषा है। लय एवं शब्द भाव माधुर्य की दृष्टि से संस्कृत कविता विश्व में बेजोड़ है। यह कहना था ज.रा.राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर के कुलपति प्रो.रामानुज देवनाथन का। यह बात उन्होंने राजस्थान संस्कृत अकादमी, जयपुर की ओर से गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में शुक्रवार को आयोजित ‘संस्कृत कवि सम्मेलन’ में कही।
अकादमी के संकुल में आयोजित इस सम्मेलन में कई कवियों ने अपनी कविताएं प्रस्तुत कीं। इसमें राष्ट्रीय गौरव, देश की वर्तमान दशा एवं दिशा तथा समाज चिंतन को विभिन्न कविता, गीत, काव्य, छंद व पाठ के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। देवर्षि कलानाथ शास्त्री, डॉ. दयानंद भार्गव, प्रो. हरिराम आचार्य सहित अन्य कई कवियों ने काव्य पाठ किया। कार्यक्रम की शुरुआत दोपहर 3 बजे से हुई।
 संस्कृत कवि सम्मेलन में काव्य पाठ करते कवि।