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मात्राओं की गणित से निखरा कथक

8 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर जयपुर
दिल्ली में रहकर नृत्य साधना कर रहे कथक के जयपुर घराने के कलाकार प्रवीण गंगानी ने शुक्रवार को जवाहर कला केंद्र में लय-ताल की गणित में नृत्य प्रेमियों को ऐसा उलझाया कि वे अंत तक वाह वाह करते रहे। मौका था केंद्र में आयोजित तीन दिवसीय उस्ताद अल्लादिया खां स्मृति संगीत समारोह के अंतिम दिन की प्रस्तुति का। प्रवीण के नृत्य में कथक का भाव पक्ष भी था, लेकिन मात्राओं की गणित उनकी प्रस्तुति का प्रमुख केंद्र रही। उनके साथ तबले पर राजेश गंगानी और अभिषेक गंगानी, सारंगी पर अकरम खां, सितार पर हरिहरशरण भट्ट ने संगत की। गायन पर विजय परिहार ने सुर दिए और मुकेश गंगानी ने पढ़ंत की।
साढ़े नौ मात्रा की अष्टवक्र ताल : गंगानी ने विघ्न हरण गज वदन गजानन... से कार्यक्रम की शुरुआत कर सबसे पहले साढ़े नौ मात्रा की अष्टवक्र ताल के माध्यम से अपनी नृत्य साधना का प्रदर्शन किया। संगीत में आधी मात्रा का कौशल अथक साधना करने वाले कलाकार ही दिखा सकते हैं। प्रवीण ने नौ मात्रा के बाद जब आधी मात्रा का कौशल दिखाया तो दर्शक बरबस ही वाह वाह कर उठे। इस नृत्य रचना में उन्होंने पक्षियों की भांति कलरव करते हुए जिस अंदाज में नृत्य मुद्राओं का प्रदर्शन किया, उससे जयपुर घराना कुछ देर के लिए लखनऊ घराने की नजाकत में डूबा हुआ नजर आया। इस दौरान गत भाव और गत निकास के अलावा तबला एवं नृत्य के सवाल-जवाब रोचक रहे।
फिर निकली मात्राओं की सवारी : कलाकार ने एक के बाद एक तीन रचनाओं में बारह और चौदह मात्राओं का कौशल दिखाया तो लगा जैसे मंच से मात्राओं की सवारी ही निकल पड़ी हो। राग बैरागी में भगवान शिव की आराधना उन्होंने अपनी शिष्य मंडली के साथ बारह मात्रा में की, चतुरंग की प्रस्तुति में चौदह मात्राओं के कौशल के साथ-साथ गायन, वादन, नृत्य और साहित्य का संगम देखने योग्य था। चौदह मात्रा की इस ताल को आड़ा चौताल कहा जाता है। इसमें कलाकारों की हस्त मुद्राएं आकर्षक रहीं।



 जेकेके में कथक पेश करते कलाकार।

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