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नहीं दिखी ‘मछली’ सर्च अभियान शुरू

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - जयपुर
रणथम्भौर की बुजुर्ग महारानी कही जाने वाली बाघिन ‘मछली’ ((टी-16)) का 15 दिन से कोई सुराग नहीं मिलने के बाद वन विभाग ने उसे खोजने के लिए शुक्रवार को सघन सर्च अभियान शुरू किया। मछली आखिरी बार 9 जनवरी को जोन नंबर 5 में देखी गई थी
और तब उसका फोटो भी सामने आया था।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तब मछली को देखकर लगा था कि उसके पांव में कुछ परेशानी है। डीएफओ राहुल भटनागर मुताबिक शुक्रवार को किए सर्च अभियान में पोलकी नाला के पास मछली के ताजा पगमार्क मिले। उम्मीद है उसका भी पता लग जाएगा।
जानकारी हो कि रणथम्भौर कि यह बाघिन कई मायनों में खास है। देश-दुनिया के पर्यटकों द्वारा जंगल और नेटवर्किंग के जरिए इसे सर्वाधिक देखे जाने, एक विदेशी संस्था की ओर से रणथम्भौर के अफसरों को मछली के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से भी नवाजा जा चुका। वहीं कुछ समय पहले ही तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और वन मंत्री रही बीना काक ने मछली पर डाक कवर जारी किया था।



बाघिन मछली, जो कि आखिरी बार जोन 5 में देखी गई

जिस क्षेत्र से टी-17 गई, वहीं मछली भी

मछली का विचरण क्षेत्र लंबे समय से बाबा की गुफा था, लेकिन कुछ समय से बाघिन टी-19 और उसके दो जवान हो रहे बच्चों टी-64 और 65 सहित टी-6, 28 और 25 का भी मछली के क्षेत्र में दबाव बढऩे लगा था। इस कारण वह जोन नंबर 5 के बूथ खोरा व पीली घाटी क्षेत्र की तरफ आ गई थी। इसके पहले बाघिन टी-17 भी आखिरी दिनों में पीली घाटी क्षेत्र में आ गई थी। इसके बाद वह लापता ही हो गई।

9 जनवरी के बाद बाघिन का कोई सुराग नहीं, शुक्रवार को पोलकी नाला में सिर्फ पगमार्क मिले