पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • गोल्ड प्रोपर्टी में निवेश की मांग बढ़ी

गोल्ड-प्रोपर्टी में निवेश की मांग बढ़ी

8 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
कॉर्पोरेट संवाददाता - जयपुर
रिजर्व बैंक के 2005 से पहले के नोटों को चलन से वापस लेने के निर्देश के बाद प्रदेश के कारोबारी जगत में जो गतिविधियां तेज हुई हैं, ये दो दृश्य उनकी सिर्फ बानगी भर हैं। निवेश के लिए हमेशा सुरक्षित माने जाने वाले सोने और प्रोपर्टी में खासतौर पर पैसा लगाने वालों की संख्या में अचानक यह इजाफा क्यों हुआ है, इससे प्रोपर्टी ब्रोकर अनमोल सिंह और ज्वैलर रामकिशोर सोनी भी परिचित हैं। वे खुद भी नहीं जानते कि इतने सारे नोट जब उनके सामने आएंगे, तो उन्हें बदलने के लिए उन्हें कितनी मशक्कत करनी होगी। उधर, सोने की मांग में रिजर्व बैंक के इस फैसले के बाद बढ़ोतरी हो गई है। सोने के आयात नियमों में ढील की संभावनाओं ने भी इसकी डिमांड बढ़ा दी है।



प्रदेश में 25,000 करोड़ का कैश?

॥यदि हम प्रदेश में इस प्रकार के कैश की बात करें तो मेरा अनुमान है यह राशि लगभग 25,000 करोड़ रुपए से आसपास हो सकती है। इसमें से कितना गोल्ड-सिल्वर की खरीदारी में सामने आएगा, यह तो कहना मुश्किल है लेकिन ज्वैलर्स के सामने भी इसको खपाने का संकट खड़ा हो जाएगा।

-सुभाष गुप्ता, अध्यक्ष राजस्थान सर्राफा संघ, जयपुर

10\\\' बढ़ेगी प्रोपर्टी की डिमांड

॥रिजर्व बैंक के इस कदम से ब्लैक मनी को बाहर निकालने में मदद मिलने के आसार हैं। यह कदम रियल एस्टेट के लिए काफी सकारात्मक रहने वाला है। प्रोपर्टी बाजार की मांग में पांच से दस फीसदी तक बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

-आत्माराम गुप्ता, चेयरमैन, एआरजी ग्रुप

ओवर ऑल स्पेंडिंग बढ़ेगी

॥कुल मिलाकर हमारी अर्थव्यवस्था में मनी सर्कुलेशन का नया दौर शुरू हो गया है। मार्केट में खरीद-फरोख्त तो बढ़ेगी ही नया निवेश भी सामने आएगा। ओवर ऑल स्पेंडिंग ((व्यय)) को भी नया बूस्ट मिल सकता है।

-प्रेम बियानी, पूर्व महासचिव, फोर्टी



अजीत सिंह - मुंबई

भारतीय रिजर्व बैंक की नोट बदलने की घोषणा से सबसे ज्यादा परेशानी अंगडिय़ों को होने वाली है। अंगडिय़ा दरअसल गुजराती भाषा में कूरियर को कहते हैं, जो मुख्य रूप से नकदी की सप्लाई का काम करते हैं। अंगडिय़ों के जरिए रोजाना एक हजार करोड़ रुपए का नकदी कारोबार होता है। दक्षिण मुंबई में हीरों और सोने के लिए प्रसिद्ध इमारत पंचरत्न में अंगडिय़ों का कारोबार धड़ल्ले से चलता है। रोजाना इतनी बड़ी मात्रा में रकम आती है कि उनके लिए नए एवं पुराने नोटों को छांटना और पुराने नोटों को नए नोट में बदलना बेहद मुश्किल चुनौती है। उनके धंधे का एक बड़ा हिस्सा बैंकों के दायरे से बाहर है। अगर उन्हें अपने पास आने वाली और पहले से इकट्ठा बड़ी रकम को नए नोटों में बदलना है तो उन्हें बैंकों के चक्कर लगाने पड़ेंगे।