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खून का सौदा : 14 हजार में बेचा 4 यूनिट खून

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - जयपुर
लैब व दवा व्यावसाइयों की मिलीभगत से एसएमएस अस्पताल के ब्लड बैंक में खून बेचने वालों का गिरोह सक्रिय है। गणतंत्र दिवस पर पहली बार अस्पताल के वार्डों में भर्ती मरीजों को निशुल्क खून उपलब्ध करवाने की घोषणा के दिन ही खून बेचने वाला पकड़ा गया। उसने मरीज के परिजन को चार यूनिट खून देने के लिए 14 हजार रु. में सौदा किया। पीडि़त से ठगी का पता चलने पर पोलीट्रोमा वार्ड के डॉक्टरों ने अस्पताल अधीक्षक डॉ. वीरेंद्र सिंह को जानकारी दी। बाद में, हरियाणा में नूह जिले के दोहा गांव निवासी पीडि़त महेंद्र मेघवाल की रिपोर्ट पर मोती डूंगरी थाना पुलिस ने आरोपी विनोद कुमार माली ((23)) को गिरफ्तार कर लिया। वह दौसा जिले के थाना कोलवा में कुंडल गांव का रहने वाला है।
डीसीपी ((पूर्व)) डॉ. अमनदीप सिंह कपूर के अनुसार, महेंद्र ने बताया कि 25 जनवरी को उसने मरीज राजू और समय सिंह को एसएमएस पहुंचाया था। इमरजेंसी में उपचार के बाद दोनों मरीजों को पोलीट्रोमा वार्ड में भर्ती करवाया गया। डॉक्टरों ने चार यूनिट रक्त की जरूरत बताई। महेंद्र 26 जनवरी को ब्लड बैंक पहुंचा, जहां उसकी मुलाकात आरोपी विनोद से मुलाकात हुई। उसने एक यूनिट खून 3500 रु. के हिसाब से दिलवाने की एवज में चार यूनिट के 14 हजार रु. मांगे। सौदा तय होने पर महेंद्र ने 9500 रु. दे दिए। विनोद ने महेंद्र को चार यूनिट खून उपलब्ध करवा दिया और बाकी रुपए बाद में देने को कहा। जब पीडि़त खून लेकर वार्ड में पहुंचा, तो पता चला कि आज खून निशुल्क मिलना था। मामला अस्पताल अधीक्षक तक पहुंचा। पीडि़त की निशानदेही पर डॉक्टरों ने विनोद को पकड़ कर पुलिस चौकी में सूचना दी।
डीसीपी कपूर के मुताबिक, जरूरतमंद मरीजों को खून व सस्ती दवाएं उपलब्ध करवाने का झांसा देकर धोखाधड़ी करने वाला गिरोह अस्पताल के आसपास मौजूद कुछ लैब व दवाइयों की दुकानों की मिलीभगत से चल रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में कुछ नाम सामने आए हैं। अस्पताल के अतिरिक्त अधीक्षक डॉ. अजीत सिंह ने बताया कि मामला सामने आने के बाद ब्लड बैंक के सभी स्टाफ व सुरक्षा गार्ड को सचेत रहने के निर्देश दिए। किसी भी व्यक्ति पर संदेह होने पर तुरंत अस्पताल अधीक्षक को सूचित कर सकता है।

सुरक्षा गार्ड को पहचान पत्र, भर्ती टिकट या अस्पताल संबंधित कागज होने पर प्रवेश करने दिया जाएगा।