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जीवन नैया गुजर रही...

7 वर्ष पहले
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प्रस्फुटन की मासिक काव्य गोष्ठी में साहित्यकारों ने सुनाई रचनाएं
सिटी रिपोर्टर जयपुर
साहित्यिक संस्था प्रस्फुटन की ओर से चैंबर भवन में आयोजित मासिक काव्य गोष्ठी में शहर के साहित्यकारों ने अपनी रचनाएं सुनाईं। गोष्ठी के मुख्य अतिथि गीतकार बनज कुमार बनज थे। अध्यक्षता गोपीनाथ गोपेश ने की।
गीतकार धनराज दाधीच की सरस्वती वंदना से शुरू हुई इस गोष्ठी में सुरेंद्र दुबे, शिवचंद जैन, नाथू लाल महावर, कन्हैया लाल सैनी कान्हा, भरत शर्मा भारत, कल्याण सिंह शेखावत, धनराज दाधीच, मुकुट सक्सेना, उषा बंब आदि साहित्यकारों ने अनेक मखमली विचारों की रचनाएं पेश कीं। सिटी भास्कर ने जुटाए चंद रचनाओं के अंश....
कृष्ण कुमार रंगीला
हाथों में सुरा का प्याला अच्छा नहीं है, महफिल में जुबां पर ताला अच्छा नहीं है। माना कि तेरे जीवन में अंधेरा बहुत मगर घर को जला किया उजाला अच्छा नहीं है।
मुकुट सक्सेना
मुझसे पल पल हिसाब मांगे हैं, खामियों का जवाब मांगे हैं। बनके हमदर्द मेरी मुश्किल में, मेरे दिल की किताब मांगे हैं।
विजय मिश्रा दानिश
शहीदों को झुकाकर सर नमन की बात करते हैं, खून करते हैं जनता का अमन की बात करते हैं। दाग दामन पे लाखों हैं मसीहा बन के बैठे जो, नोच डाला है गुलशन को चमन की बात करते हैं।
बनज कुमार बनज
हम सब मिलकर ऐसा प्यारा अपना हिंदुस्तान बनाते, जिसमें दुख दस्तक तो देते, मगर द्वार न खुलवा पाते।