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२००५ से पहले के नोटों पर इनकम टैक्स की भी नजर
भास्कर न्यूज - जयपुर
2005 से पहले के बैंक नोट बदलवाने के बारे में आरबीआई की ओर से दिए जा रहे एक्सचेंज ऑफर पर आयकर विभाग की भी नजर रहेगी क्योंकि इस दौरान भारी मात्रा में कालाधन बाहर आ सकता है। फिलहाल विभाग की अन्वेषण शाखा आरबीआई की स्पष्ट गाइडलाइन का इंतजार कर रही है। वहीं बैंकों में भी अभी नोट बदलवाने
वालों की हलचल नजर नहीं आ रही। आरबीआई स्पष्ट कर चुका है कि 1 अप्रैल से लेकर जून तक 2005 से पहले के नोट बदलवाने वालों से किसी प्रकार का पहचान पत्र नहीं लिया जाएगा।
आयकर विभाग के एक शीर्ष अधिकारी के अनुसार, एक्सचेंज ऑफर के दौरान कालेधन की निकासी की संभावना के मद्देनजर, विभाग ऐसे मामलों को ट्रैक करने के लिए जुलाई से नई रणनीति लागू करेगा। हालांकि इस बीच बड़ी तादाद में करेंसी एक्सचेंज पर भी नजर रखी जाएगी। फिलहाल इस मामले को लेकर आयकर विभाग और आरबीआई के बीच कोई बात नहीं हुई है, लेकिन विभाग को जरूरत महसूस हुई, तो वह आरबीआई को पत्र भी लिख सकता है।
22 जनवरी का सर्कुलर : 2005 से पहले के वे बैंक नोट, जिन पर प्रिंटिंग का साल नहीं छपा है, 1 अप्रैल 2014 से चलन में नहीं रहेंगे। इस तारीख को वे लोग, जिनका बैंकों में खाता है अथवा नहीं है, बैंक शाखा में जाकर इस अवधि वाले नोट एक्सचेंज करवा सकेंगे। हालांकि 1 जुलाई के बाद 500 रु. और 1000 रु. के 10 नोट से ज्यादा एक्सचेंज करवाने के लिए उन लोगों को बैंकों में आईडी प्रूफ देना होगा, जिनके संबंधित बैंक में खाते नहीं हैं।
निदेशक ((अन्वेषण)) सुनील माथुर बताते हैं- फिलहाल नोट बदलने की निगरानी में थोड़ा समय है। हम अभी आरबीआई की स्पष्ट गाइडलाइन का इंतजार कर रहे हैं। वैसे भी आयकर विभाग काले धन से जुड़े मामलों पर हमेशा नजर रखता ही है।
2004-05 में आरबीआई ने साल 12,593 मिलियन नोट जारी किए। आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक इन नोटों की वैल्यू 1,43,102 करोड़ रुपए हैं। आरबीआई ने स्पष्ट किया है- 2005 से पूर्व के नोट जिन पर प्रिंटिंग का वर्ष छपा है, जुलाई के बाद भी बाजार में चलन में रहेंगे।
अधिकारी ने बताया कि इस तरह के मामलों को ट्रैक करना मुश्किल होगा, क्योंकि 1 अप्रैल से 30 जून तक एक्सचेंज के लिए बैंकों में किसी तरह का पहचान-पत्र नहीं देना होगा। जिनके पास काला धन है, वे उसे गोल्ड या रियल एस्टेट में भी खपा सकते हैं। विभाग की अन्वेषण शाखा और आईएंडसीआई विंग बैंकों में होने वाले ऐसे लेन-देन पर नजर रखते हैं। आईएंडसीआई ऐसे इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट सिस्टम से लैस है, जहां 2006 से लेकर अब तक वह किसी भी पैन कार्ड धारक के खातों की पूरी जानकारी एक क्लिक पर जुटा सकता है।
मुश्किल : काला धन कहीं भी खपा सकते हैं