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राज्य में हो पोलीग्राफी व नारको टेस्ट

7 वर्ष पहले
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जयपुर. आपराधिक मामलों में पोलीग्राफी व नारको टेस्ट की बढ़ती उपयोगिता पर हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को कहा कि जल्द अनुसंधान के लिए राज्य में ही इन टेस्टों को कराने की क्या संभावनाएं हैं। मुख्य सचिव व्यक्तिगत रूप से इसे देखें व विचार करें।

न्यायाधीश अजय रस्तोगी व जेके रांका की खंडपीठ ने यह अंतरिम आदेश रतनलाल की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया। खंडपीठ ने कहा कि पोलीग्राफी टेस्ट दिल्ली व गुजरात में ही होते हैं। अपराध मामलों में इन टेस्टों का उपयोग बढ़ा है और मुकदमों के जल्द निपटारे के लिए यह जरूरी है। अधिवक्ता प्रेमचंद देवंदा ने बताया कि प्रार्थी का बेटा चार साल से लापता है। मामले में अलवर में मामला दर्ज कराया था, लेकिन क्षेत्राधिकार के आधार पर पुलिस ने मामले में एफआर लगा दी।

सिंधीकैंप थाने ने भी एफआर लगा दी। स्थानीय कोर्ट ने मामले को अलवर भेज दिया। पुलिस के इस रवैये पर प्रार्थी ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर बेटे को पेश करवाने की गुहार की। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया कि चार जनों का पोलीग्राफी राज्य से बाहर हुआ था, जिनमें से प्रहलाद पर संदेह है। राज्य के बाहर पोलीग्राफ कराने पर अदालत ने मुख्य सचिव को प्रदेश में ही पोलीग्राफ व नारको टेस्ट करवाने पर विचार करने का निर्देश दिया।