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अफसरों ने विधानसभा में पेश किए गुमराह करने वाले आंकड़े

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - जयपुर
राजस्थान पुरासंपदा विकास एवं प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा कराए जा रहे विभिन्न सिविल कार्यों की गुणवत्ता जांचने को लेकर विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में प्राधिकरण अफसरों ने सच बताने के बजाए सिर्फ आकड़ों से गुमराह करने का काम किया है। दरअसल प्राधिकरण ने 11 महीने पहले खुद की क्वालिटी कंट्रोल लैब स्थापित की थी। इसके बावजूद लैब में सभी साइट ((स्मारक जहां काम चल रहे हैं)) से सैंपल उठाकर जांचने के लिए आज दिन तक कोई व्यवस्था नहीं की, न ही लैब के लिए अलग विंग बनाई। इस लैब में महज एक ही साइट ((टाउन हॉल म्यूजियम)) के गिने-चुने सैंपल उठाए गए। कमाल की बात यह रही कि इन्हें जांचने वाले इंजीनियर खुद ही सैंपल उठाते और खुद ही जांच भी लेते। ऐसे में सैंपल फेल होने का सवाल ही नहीं उठता।
विधानसभा में हनुमान बेनीवाल ने पूछा था कि प्राधिकरण में कराए गए कार्यों की गुणवत्ता जांचने के क्या मानदंड हैं और कौन-सी एजेंसी है? जवाब में प्राधिकरण ने चार निजी लैब से सैंपल जांचने की टेबल बनाकर पेश कर दी। असल में सैंपल भरने से लेकर जांच कराने तक की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार पर ही छोड़ी हुई है।
इंजीनियर तो महज सैंपल भेजने से पहले संबंधित निजी फर्म के नाम पत्र लिखते रहे हैं।