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एक माह में मिलेगी एसीबी की हर एफएसएल जांच रिपोर्ट

7 वर्ष पहले
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जयपुर. बड़े अपराधों की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट को सालों तक लटकाने के लिए बदनाम राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला (फॉरेंसिक साइंस लैब) में सुधार के लिए नया प्लान बन रहा है। इसके तहत फरवरी-मार्च से संगीन अपराध और एसीबी द्वारा सौंपे हर एफएसएल सैंपल की जांच रिपोर्ट एक माह के अंदर देनी अनिवार्य होगी। जो अधिकारी एसीबी के ट्रैप और अन्य प्रमुख मामलों की रिपोर्ट एक माह में नहीं देंगे, उनके खिलाफ सख्ती बरती जाएगी।

नए प्लान में बाकायदा एफएसएल जांच के सैंपल आने से लेकर रिपोर्ट तैयार करने तक की प्रक्रिया को नियत समय में पूरा करने की अनिवार्यता शामिल है। पिछले 10 साल में प्रदेशभर से लैब में आईं करीब 10 हजार एफएसएल जांच लंबे समय तक अटकी रहीं, लेकिन पिछले एक साल में जांच का निस्तारण 14 से 20 फीसदी बढ़ गया है। पिछले दो-तीन साल में लैब भेजी जाने वाली एसीबी जांचों की संख्या बढ़कर करीब एक तिहाई हो गई है।

॥मैंने सबसे पहले राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला की समस्याओं पर ध्यान दिया। सालों से रिक्त 119 पदों पर भर्ती की। अब कुछ और रिक्त पदों पर भर्ती का प्रस्ताव सरकार को भेजा है। हम अगले माह से ही नए प्लान के अनुसार एसीबी के प्रत्येक सैंपल और बड़ी अपराधों के सैंपल की रिपोर्ट एक माह से पहले तैयार कर दे देंगे।
आर वेंकटेश्वरन, कार्यकारी निदेशक, स्टेट फोरेंसिक साइंस लैब, जयपुर

3 साल में सैंपल जांचने की गति

वर्ष सैंपल पहुंचे जांच रिपोर्ट तैयार

2011 24229 23010

2012 25565 26847

2013 25991 26856

फोरेंसिक जांच के आधार पर सजा

यौन उत्पीडऩ मामले की जांच रिपोर्ट पर आसाराम को जेल, मंत्री बाबूलाल नागर के डीएनए टेस्ट के आधार पर उनको जेल, राजसमंद में हत्या-दुष्कर्म के मामले की डीएनए रिपोर्ट से फांसी की सजा और जोधपुर के सरकारी अस्पताल में बच्चे बदलने का डीएनए परीक्षण।

19,335 तक हो गई थी पेंडेंसी

लैब में 2001 में एफएसएल सैंपल जांचों की पेंडेंसी 19,335 तक पहुंच गई थी। हालांकि 2011 तक यह 15,054 रही। फिर आज तक कभी शून्य नहीं हुई। इस कारण पूरे राज्य में फोरेंसिक लैब पर सवाल उठने लगे कि कितने ही बड़े अपराध की जांच एक बार लैब को देने के बाद उसकी रिपोर्ट समय पर कभी नहीं दी जाती। पुलिस अपराधी के खिलाफ अन्य कार्रवाई पूरी कर देती है, लेकिन एफएसएल रिपोर्ट नहीं आने से अपराधी को सालों तक सजा अटक जाती या मिलती ही नहीं है।

119 कनिष्ठ वैज्ञानिकों की भर्ती कर घटाई पेंडेंसी

पिछले साल नए निदेशक आर वेंकटेश्वरन ने फोरेंसिक लैब में पेंडेंसी को समाप्त करने के लिए एक अभियान चलाया, लेकिन सबसे बड़ी बाधा मैनपावर की थी। इस पर लैब में वरिष्ठ वैज्ञानिकों को सहयोग और प्राइमरी लेवल पर सैंपल तैयार करने के लिए 119 रिक्त पदों पर कनिष्ठ वैज्ञानिकों की भर्ती की गई। इसके बाद जांचों में अचानक तेजी आई। इसी लैब में 2010 में 23,533 सैंपलों की जांच की गई, वहीं पिछले साल 26,856 सैंपलों की जांच रिपोर्ट तैयार की गई। यह 2010 की तुलना में 14.1 फीसदी ज्यादा है।