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विधानसभा में फिर उठा बजरी का मामला

7 वर्ष पहले
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विधानसभा संवाददाता - जयपुर
राज्य विधानसभा में बुधवार को एक बार फिर बजरी का मामला छाया रहा। पहले तो प्रश्नकाल में फिर बाद में स्थगन प्रस्ताव पर यह मामला गरमाया। विधायक रमेश मीणा के टोंक में बजरी खनन ठेके में अनियमितता पर प्रश्नकाल में पूछे गए सवाल का उत्तर देते हुए मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि खनन संबंधी अनियमितताओं को देखते हुए मौके पर निरीक्षण किया गया था। उसी समय खनन करने वालों को नोटिस दिए गए थे।
इस पर रमेश मीणा फिर बोले, नोटिस पर कार्रवाई क्या हुई? इस पर कई विधायक भी खड़े हो गए और अपनी बात कहते रहे। प्रद्युम्न सिंह ने कहा कि नोटिस के जवाब में यदि कुछ लोगों पर कार्रवाई होगी तो अच्छा मैसेज जाएगा और अन्य गलत काम करने वालों पर अंकुश लगेगा, क्योंकि बजरी को लेकर जो भी पॉलिसी सरकार लाने वाली है, उसमें समय लगेगा।
माफिया को पनपने नहीं देंगे
सवालों के जवाब में राठौड़ ने कहा कि खनन करने वालों ने नोटिस के क्या जवाब दिए हैं, उन्हें जांचा जाएगा कि कौन-कौन दोषी हैं। दोषियों पर कार्रवाई करेंगे। किसी भी सूरत में खनन माफिया पनपने नहीं दिया जाएगा।
स्थगन प्रस्ताव में भी उठाया मसला
जैसे ही प्रश्नकाल समाप्त हुआ और स्थगन प्रस्ताव के लिए विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने बोलना शुरू किया, नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी खड़े हो गए। उन्होंने फिर बजरी का मामला उठाया और कहा, इस मुद्दे पर आसन की ओर से आधे घंटे चर्चा की व्यवस्था दी गई थी। वह चर्चा कब होगी। उन्होंने नागौर में धरने पर बैठे किसानों का मामला भी उठाया। इस पर विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने कहा कि निश्चित ही वे इस पर इसी सत्र में चर्चा कराएंगे। असंतुष्ट हनुमान बेनीवाल और रमेश मीणा फिर खड़े होकर बोलने लगे।
अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने हनुमान बेनीवाल को कहा कि आप बैठिए। जरूरी नहीं कि सरकार वैसा ही उत्तर दे जैसा आप कहलवाना चाहें। इस पर बेनीवाल बोले, आपके कहने पर मैं रोज ही तो बैठ जाता हूं। तब ही किरोड़ीलाल मीणा भी खड़े हो गए और कहने लगे। अध्यक्ष जी, आप पर मेरा असर नहीं आना चाहिए। फिर हमें कौन समझाएगा। इस पर मेघवाल ने कहा, असल में मेरी आवाज तेज है। आवेश में आई आवाज से वैसा ही जवाब देने से सदन की रोचकता बढ़ जाती है। हमें प्रेम से विधानसभा को चलाना है। मेरे तेज बोलने से कोई सदस्य यह नहीं समझे कि मैं उसके खिलाफ बोल रहा हूं या विरोध में हूं।



जरूरी नहीं कि वही जवाब

दिया जाए, जो आप चाहें

बजरी खनन ठेके में अनियमितता का निरीक्षण कर खनन करने वालों को नोटिस दिए : राठौड़

अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने हनुमान बेनीवाल को कहा कि आप बैठिए। जरूरी नहीं कि सरकार वैसा ही उत्तर दे जैसा आप कहलवाना चाहें। इस पर बेनीवाल बोले, आपके कहने पर मैं रोज ही तो बैठ जाता हूं। तब ही किरोड़ीलाल मीणा भी खड़े हो गए और कहने लगे। अध्यक्ष जी, आप पर मेरा असर नहीं आना चाहिए। फिर हमें कौन समझाएगा। इस पर मेघवाल ने कहा, असल में मेरी आवाज तेज है। आवेश में आई आवाज से वैसा ही जवाब देने से सदन की रोचकता बढ़ जाती है। हमें प्रेम से विधानसभा को चलाना है। मेरे तेज बोलने से कोई सदस्य यह नहीं समझे कि मैं उसके खिलाफ बोल रहा हूं या विरोध में हूं।

माफिया को पनपने नहीं देंगे

सवालों के जवाब में राठौड़ ने कहा कि खनन करने वालों ने नोटिस के क्या जवाब दिए हैं, उन्हें जांचा जाएगा कि कौन-कौन दोषी हैं। दोषियों पर कार्रवाई करेंगे। किसी भी सूरत में खनन माफिया पनपने नहीं दिया जाएगा।

स्थगन प्रस्ताव में भी उठाया मसला

जैसे ही प्रश्नकाल समाप्त हुआ और स्थगन प्रस्ताव के लिए विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने बोलना शुरू किया, नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी खड़े हो गए। उन्होंने फिर बजरी का मामला उठाया और कहा, इस मुद्दे पर आसन की ओर से आधे घंटे चर्चा की व्यवस्था दी गई थी। वह चर्चा कब होगी। उन्होंने नागौर में धरने पर बैठे किसानों का मामला भी उठाया। इस पर विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने कहा कि निश्चित ही वे इस पर इसी सत्र में चर्चा कराएंगे। असंतुष्ट हनुमान बेनीवाल और रमेश मीणा फिर खड़े होकर बोलने लगे।