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मेट्रो-रिफाइनरी के मुद्दे पर दो पूर्व वित्त मंत्री आमने-सामने
विधानसभा संवाददाता - जयपुर
राज्य विधानसभा में बुधवार को जयपुर के मेट्रो प्रोजेक्ट और बाड़मेर के रिफाइनरी प्रोजेक्ट पर दो पूर्व वित्तमंत्री आमने-सामने हो गए। भाजपा सरकार में वित्त मंत्री रहे और इस बार निर्दलीय विधायक बने माणिकचंद सुराणा ने मेट्रो और रिफाइनरी की प्लानिंग आर्थिक रूप से बेकार बताई। उन्होंने कहा कि मेट्रो में अब तक जो काम हो गया है, उसे पूरा करके आगे के फेज को रद्द कर देना चाहिए। वहीं कांग्रेस सरकार में वित्त मंत्री रहे प्रद्युम्नसिंह ने कहा, दोनों प्रोजेक्ट की प्लानिंग अच्छी है, दोनों ही प्रोजेक्ट राजस्थान के लिए जरूरी है।
9 से 19 हजार करोड़ का कैसे हुआ मेट्रो प्रोजेक्ट ?: सुराणा
राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस के दौरान माणिकचंद सुराणा ने पिछली सरकार की योजना मेट्रो और रिफाइनरी को आड़े हाथों लिया। उनका कहना था कि जो मेट्रो योजना मूल रूप से 9 हजार करोड़ की थी, वह बढ़ते-बढ़ते 19 हजार करोड़ की हो गई। इतनी लागत क्यों बढ़ गई? जयपुर मेट्रो कॉरपोरेशन ((जेएमआरसी)) को 9 जमीनें दी गईं, जिनकी कीमत 4 हजार करोड़ रुपए बनती है। जेएमआरसी को जमीनें देने का फैसला सिर्फ कैबिनेट ने ले लिया, विधानसभा में चर्चा तक नहीं हुई। प्रोजेक्ट की डीपीआर के पेज नंबर 427 पर लिखा है कि 2015 से 2044 तक हर साल मेट्रो को घाटे की भरपाई के लिए सरकार की ओर से 192 करोड़ रुपए देने पड़ेंगे। मेरा मानना है कि इस प्रोजेक्ट से राजस्व का भारी नुकसान होगा। ऐसे में पहले फेज पर चल रहे काम को पूरा करने के बाद दूसरे चरण को रद्द कर देना ही सरकार के लिए बेहतर होगा। उन्होंने रिफाइनरी प्रोजेक्ट को भी राजस्थान की कमर तोड़ देने वाला बताते हुए समीक्षा की बात कही। सुराणा का कहना था कि अच्छा तो यह रहेगा कि मौजूदा वित्तीय ढांचे को बदलकर रिफाइनरी का वल्र्डवाइड टेंडर कराया जाए।
20 लाख की आबादी वाले शहरों में तो केंद्र चाहता है मेट्रो आए: प्रद्युम्रसिंह
माणिकचंद सुराणा के उठाए गए सवालों पर पूर्व वित्त मंत्री प्रद्युम्रसिंह ने पलटवार किए। उन्होंने कहा कि एक तरफ मेट्रो को अव्यवहारिक बताकर बंद करने की बात हो रही है, वहीं केंद्र सरकार की एडवाइजरी कमेटी पहले ही 20 लाख की आबादी वाले शहरों में मेट्रो की जरूरत बता चुकी है। जयपुर चारों तरफ बढ़ रहा है, आबादी पचास लाख के पास पहुंच चुकी है। ऐसे में मेट्रो की शहर को बेहद जरूरत है। उन्होंने रिफाइनरी के मुद्दे पर कहा कि मथुरा रिफाइनरी और भठिंडा रिफाइनरी में तो पाइप लाइन से क्रूड पहुंचता है जबकि हमारी रिफाइनरी तो बन ही उस जगह रही है, जहां क्रूड के भंडार है। सरकार को चाहिए कि इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाए।